तेलंगाना हाईकोर्ट : दामागुंडम में प्रस्तावित राडार केंद्र पर रिपोर्ट तलब

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने विकाराबाद ज़िले के दामागुंडम के संरक्षित वन क्षेत्र में राडार केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया के तहत काटे गए पेड़ पौधों को अन्य क्षेत्र में पुन लगाने के कार्यों के संबंध में तुरंत स्थिति रिपोर्ट पेश करने के केंद्र व राज्य सरकार को आदेश दिए। अदालत ने काटे गए पेड़-पौधों को दूसरे क्षेत्र में लगाकर उनके फलने-फूलने तक की जाने वाली संरक्षण संबंधी कार्रवाई का भी विवरण देने के आदेश दिए।

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि काटे गए पेड़-पौधे कहीं और लगाए जा सकते हैं, लेकिन इन पेड़-पौधों पर आधारित पशु-पक्षियों का क्या होगी। अदालत ने कहा कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में पक्षी, शीतकाल के दौरान आने वाले चिड़िया, भूमि की ऊर्वरकता को बनाए रखने वाले कीट व अन्य पशुओं के रक्षण की जिम्मेदारी किसकी होगी। वन का आशय केवल पेड़-पौधे ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी आदि भी है। इस प्रकार वनों को काटने से इस पर आधारित पशु-पक्षियों के जीवन का क्या होगा।

बायो डाइवर्सिटी एक्ट के तहत गठित समिति पर विस्तृत विवरण तलब

इस मामले को लेकर गठित अमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक जैन के अदालत का ध्यान में लाया कि इसके पूर्व दिए गए आदेश के अनुसार केंद्र व राज्य सरकार ने काटे गए पेड़-पौधों को पुन स्थापित करने के संबंध में स्पष्टता नहीं दर्शाई है। इस पर अदालत ने रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। अदालत ने कितने पेड़-पौधे हटाए गए और इन्हें कहाँ पर स्थापित किया गया और स्थापित किए गए पेड़-पौधों में कितने जीवित बचे हैं, इसकी पूर्ण रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए।

इस आदेश के साथ मामले की सुनवाई 20 दिसंबर तक स्थगित कर दी गई। अदालत ने इसके अलावा बायो डाइवर्सिटी एक्ट के तहत गठित समिति की रिपोर्ट के दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन पर भी विस्तृत विवरण तलब किया। राडार प्रॉजेक्ट के लिए आवंटित वन भूमि के अतिरिक्त वन क्षेत्र के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों का भी ब्यौरा पेश करने के आदेश दिए।

अमिकस क्यूरी ने वन पुनर्विकास और राडार किरणों के प्रभाव पर सवाल उठाए

राडार प्रॉजेक्ट सेंटर की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा 2,900 एकड़ वन भूमि स्थानांतरित करते हुए जारी सरकारी आदेश को चुनौती देते हुए दामागुंडम फारेस्ट प्रोटेक्शन जेएसी की ओर से वर्ष 2020 में दायर जनहित याचिका पर आज पुन एक बार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान अमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक जैन ने दलील देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण हेतु विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में स्पष्टता नहीं है। एक अनुपात दो के स्तर पर वन क्षेत्र को पुन विकसित करने के नियम को लेकर केंद्र सरकार मौन धारण किए हुए है। हटाए गए वन क्षेत्र की तुलना में दुगुनी भूमि पर जल सेना के अधिकारियों द्वारा विकास किया जाना है। राडार केंद्र से निकलने वाली किरणों के कारण पशु-पक्षियों पर दुप्रभाव पड़ेगा।

यह प्रभाव कितना घातक होगा, इसके बारे में सरकार ने कोई स्पष्टता नहीं दी है। कितने वर्ष तक यह प्रभाव रहेगा, इसका भी कोई खुलासा नहीं किया गया। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए बताया कि इस मामले को लेकर प्रतियाचिका दायर की गई। पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर नेवल कमांडर द्वारा किए गए अध्ययन की रिपोर्ट के बारे में समय देने पर बताया जाएगा।

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राडार केंद्र की स्थापना उच्च न्यायालय के आदेशों के अधीन रहेगी

सील्ड कवर में यह रिपोर्ट खण्डपीठ को सौंपी गई। उन्होंने कहा कि हटाए गए पेड़-पौधों को अन्य क्षेत्रों में लगाए जाने की प्रक्रिया जारी है। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए बताया कि बायो डाइवर्सिटी नियम के अनुसार सरकार ने समिति का गठन किया। सरपंच की अध्यक्षता में समिति गठित की जानी है, लेकिन गत फरवरी-2024 को सरपंच का निधन होने के कारण वर्तमान में समिति अस्तित्व में नहीं है।

सरपंच चुनाव संपन्न होने के बाद पुन समिति का गठन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 9,538 पेड़-पौधे हटाए गए, अक्तूबर माह के अंत तक 7,822 पेड़-पौधे पुन स्थापित किए गए। इनमें से 3,947 लगाए गए पेड़-पौधे हरे-भरे हो रहे हैं। केवल 263 विस्थापित पेड़-पौधे नहीं बच पाए। इतना ही नहीं, 4,212 विस्थापित पेड़-पौधे काफी अच्छी स्थिति में हैं। कुल मिलाकर विस्थापित 93.7 प्रतिशत पेड़-पौधे पुन जीवन को प्राप्त कर चुके हैं।

अगले अप्रैल माह तक 25 हजार नए पौधे तम्मावरम संरक्षित वन क्षेत्र में लगाए जाएँगे। गौरतलब है कि खण्डपीठ ने इसके पूर्व राडार प्रॉजेक्ट सेंटर की स्थापना पर रोक लगाने के लिए जारी अंतरिम स्थगनादेश को वर्ष 2021 के दौरान रद्द कर दिया था। रद्द करने संबंधी आदेश को आज पुन एक बार विस्तार देते हुए बताया कि राडार केंद्र की स्थापना अदालत के आदेश के अधीन रहेगी। इसके साथ ही सुनवाई 20 दिसंबर स्थगित कर दी गई।

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