उच्च न्यायालय ने ऋण माफी संबंधी आदेशों को खारिज किया
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सिद्दिपेट निर्वाचन क्षेत्र में किसानों के ऋण माफ न करना कोई व्यक्तिगत मामला नहीं है, इसलिए इस याचिका पर कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस याचिका के माध्यम से व्यापक जनहित की माँग नहीं की जा सकती। न्यायालय ने सिद्दीपेट के विधायक व भारास नेता और पूर्व मंत्री टी. हरीश राव की याचिका पर कोई आदेश जारी न करने का निर्णय लिया है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस सुरेपल्ली नंदा ने गुरुवार को टी. हरीश राव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने सिद्दीपेट निर्वाचन क्षेत्र के किसानों के लिए ऋण माफी योजना को पूरी तरह से लागू करने में राज्य सरकार की विफलता को चुनौती दी है।
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वादे से अधिक ऋण लेने पर योजना लागू नहीं
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रामावरम चंद्रशेखर रेड्डी ने दलील देते हुए कहा कि यह योजना कई लोगों के लिए लागू नहीं हो पाई क्योंकि मुख्यमंत्री ने 2 लाख रुपये तक के ऋण माफ करने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने इससे अधिक राशि का ऋण ले लिया था। उन्होंने कहा कि निर्वाचन क्षेत्र के 5 मंडलों में 22,849 किसानों के लिए ऋण माफी योजना लागू नहीं की गई। उन्होंने कहा कि किसानों को उच्च न्यायालय आना पड़ा क्योंकि वे प्रतिदिन याचिकाकर्ता, जो कि विधायक हैं, को अपनी याचिकाएँ सौंप रहे थे। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने पहले भी ऐसे मामलों में आदेश दिए हैं। सरकारी अधिवक्ता ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह जनहित का मामला है। यदि चाहें तो जनहित याचिका दायर की जा सकती है।
दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि जनहित के मामले में दायर याचिका पर आदेश नहीं दिया जा सकता। उन्होंने इसे जनहित याचिका में परिवर्तित करने का सुझाव दिया। चूँकि अधिवक्ता ने याचिका को जनहित याचिका में परिवर्तित करने से इनकार कर दिया, इसलिए उन्होंने याचिका वापस लेने की बात कही। न्यायाधीश ने याचिका खारिज कर दी और याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए जनहित याचिका दायर करने का अवसर दिया।
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