भगवान जंभेश्वर की सीख है आज भी प्रासंगिक
आज तकनीक ने मानव को आधुनिक युग का निर्माता बना दिया है। मानव निरंतर विकास कर रहा है और भूमि, आकाश तथा जल पर अपनी शक्ति और सामर्थ्य से समय गुजारने में सक्षम हो गया है। इसी के साथ प्रकृति के इन तत्वों से बहुत छेड़छाड़ कर रहा है। मानव की इच्छाएँ अनंत हैं। सुरसा राक्षसी के समान उसकी इच्छाएँ बढ़ती ही रहती हैं जिस कारण वह प्रकृति के हर तत्व का दोहन करता चला जा रहा है।
चाहे जंगल हों या पहाड़, जल हो या वायु, पेड़-पौधे हों या जीव-जंतु सब मानव की विस्तारवादी सोच का शिकार हो रहे हैं। इन प्रकृति के तत्वों का रूप-रंग बदल रहा है। आज से 14वीं शताब्दी में संत जंभोजी हुए थे। उन्होंने ही बिश्नोई समाज की नींव रखी थी। उन्होंने उन्नतीस नियम स्थापित किए हैं, जो इस प्रकार है- 1 शिशु जन्म पर दस दिन का सूतक, 2 ऋतुवंती स्त्री का पांच दिनों तक आग्रह कार्यों से पृथक रहना, 3 प्रतिदिन सवेरे स्नान करना, 4 शील का पालन करना, 5 संतोष धारण करना,
6 बाह्य और आभ्यांतरिक पवित्रता रखना, 7 दोनों समय संध्या व उपासना करना, 8 संध्या समय आरती और हरि-गुण गाना, 9 निष्ठा और प्रेमपूर्वक हवन करना, 10 ईंधन बिनकर और दूध एवं पानी को छान कर व्यवहार में लाना, 11 वाणी विचार कर बोलना, 12 क्षमा व दया धारण करना, 13 चोरी नहीं करनी, 14 निंदा नहीं करना, 15 झूठ नहीं बोलना, 16 वाद-विवाद का त्याग करना, 17 अमावस्या का व्रत रखना, 18 विष्णु का भजन करना, 19 जीवों पर दया करना,
पर्यावरण संकट के समाधान में जंभेश्वर जी के उपदेशों की प्रासंगिकता
20 हरा वृक्ष नहीं काटना 21 काम-क्रोध आदि नकारत्मक भावों को वश में करना और जीवन-मुक्ति की ओर बढ़ना, 22 नेक कमाई करना, 23 वन्य पशुओं की रक्षा करना 24 बैल को नपुंसक (बधिया) नहीं करना, 25 अफीम का सेवन नहीं करना, 26 तंबाकू व भांग का सेवन नहीं करना, 27 शराब नहीं पीना 28 मांस नहीं खाना, 29 काला व नीला वस्त्र धारण नहीं करना। वास्तव में ये सभी नियम मानव समाज के लिए मान्य होने चाहिए।

इन नियमों को अपनाकर मानव जगत प्रकृति के सभी तत्वों की रक्षा कर सकता है। मानव-विकास की गतिविधियों के कारण ही जंगल नष्ट हो रहे हैं, नदियों और समुद्र का जल दूषित हो रहा है, पहाड़ काटे जा रहे हैं, आकाश में भी कचरा जमा हो रहा है, वायु अशुद्ध हो रही है। इन परिस्थितियों का मानव शरीर पर भी कुप्रभाव पड़ रहा है और कीट, पशु व जलचरों का जीवन असुरक्षित हो रहा है। अत भगवान जंभेश्वर के इन वचनों का पालन सभी धर्म के लोगों को करना चाहिए।
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