भाषाओं के लिए अनुवाद ऑक्सीजन के समान : प्रो.मोलुगरम

हैदराबाद, उस्मानिया विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा डॉ. बी.आर. अंबेडकर अनुसंधान केंद्र में भाषाओं का सेतु : अनुवाद का सिद्धांत और व्यवहार शीर्षक से एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य अनुवाद के सैद्धांतिक और व्यावहारिक आयामों का पता लगाना और व्यापक राष्ट्रीय और वैश्विक पहुँच के लिए क्षेत्रीय साहित्य के अंग्रेजी अनुवाद को प्रोत्साहित करना था।

उस्मानिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुमार मोलुगरम ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत जैसे बहुभाषी देश में अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनुवाद को भाषाओं के लिए ऑक्सीजन के समान बताते हुए अनुवादकों को संस्कृतियों और ज्ञान प्रणालियों के बीच सेतु बनाने वाले वास्तुकार के रूप में संदर्भित किया। उन्होंने अनुवाद को सुगम बनाने में डिजिटल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही सावधानीपूर्वक चयन, सत्यापन और परिणाम-उन्मुख अनुवाद पद्धतियों की आवश्यकता पर बल देते हुए छात्रों को प्रासंगिक जानकारी चुनने की क्षमता विकसित करने हेतु प्रोत्साहित किया।

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अनुवाद अर्थ को स्थानांतरित करने की संवेदनशील प्रक्रिया

डॉ. कोंडा नागेश्वर राव ने कार्यशाला के विषय का परिचय देते हुए कहा कि अनुवाद मात्र शब्दों का स्थानांतरण नहीं, वरन यह भाषाओं के बीच संस्कृति और अर्थ को स्थानांतरित करने की एक संवेदनशील प्रक्रिया है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि तेलंगाना साहित्य को वह मान्यता नहीं मिली है, जिसका वह हकदार है। उन्होंने क्षेत्रीय रचनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक पहुँचाने के लिए अनुवाद की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में आयोजित विभिन्न सत्रों में नमोजू बालाचारी ने तेलुगु साहित्य का अन्य भाषाओं में अनुवाद करने के महत्व पर बल देते हुए अनुवाद अध्ययन केंद्र की स्थापना का सुझाव दिया। प्रो. लिंगप्पा ने दक्षिण भारतीय भाषाओं के बीच भाषाई निकटता के बारे में बात की।

डॉ. सवीन सौदा ने अनुवाद के क्षेत्र में विभाग की दीर्घकालिक भागीदारी पर प्रकाश डाला। प्रो. तारकेश्वर ने अनुवाद अध्ययन के इतिहास, अनुसंधान विधियों और प्रासंगिकता पर चर्चा की। डॉ. देबाशीष लहरी ने ऑनलाइन व्याख्यान में अनुवादकों की भूमिका पर बल दिया। हैदराबाद बुक ट्रस्ट की अनुवादक, लेखिका और प्रकाशक गीता रामास्वामी ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में अनुवाद की भूमिका पर विचार साझा किए। अवसर पर अंग्रेजी विभाग के संकाय सदस्य, शोधार्थी, छात्र सहित अन्य उपस्थित थे।

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