देश के सीमावर्ती परिवारों के मसीहा विजय चोपड़ा

सीमा पर जब भी जंग चलती है तो यह समय सैनिकों व उनके परिवारों के लिए बहुत विकट हो जाता है, लेकिन कुछ और लोग भी हैं जिनका इस युद्ध के माहौल में सब खत्म हो जाता है। इन्हें भी सीमा-प्रहरी कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा। ये लोग वो हैं, जो दुश्मन-देश की तरफ से भारतीय-सीमा पर हो रही हर आतंकी गतिविधि पर बारीकी से नजर रखते हैं और उसकी सूचना आर्मी को देकर आने वाले खतरे से आगाह करते हैं। किंतु सरकार ने कभी इनके जीवन को बेहतर बनाने की सुध नहीं ली।

भारत और पाकिस्तान की सीमा से सटे हुए डोडा, पुंछ, राजौरी, कठुआ, श्रीनगर, सोनमर्ग जैसे आतंकी इलाकों में रह रहे सैकड़ों परिवारों को देश का प्रसिद्ध मीडिया समूह पंजाब केसरी इनकी बुनियादी जरूरत का हर सामान भेजा है। पंजाब केसरी के प्रधान संपादक, निर्भीक पत्रकार, समाज-सेवी पद्मश्री प्राप्त 94 वर्षीय विजय चोपड़ा पिछले तीस सालों से ये कार्य कर रहे हैं। इन वर्षों के दरम्यान विषम परिस्थितियों में भी अब तक राहत सामग्री के 910 ट्रक भेज चुके हैं और वतन के रखवालों के प्रति देश-भक्ति का फर्ज निभा रहे हैं।

यह सब संयोगवश नहीं हुआ। राष्ट्र भक्ति इस परिवार के खून में है। पंजाब केसरी ग्रुप वर्षों से देश के हर शहीद परिवार के लिए भी साल में दो बार सम्मान-समारोह आयोजित करता है जिसमें शहीद परिवारों को मशीनें, राशन, पैसा आदि देकर सहयोग प्रदान करता है। इनके दादा लाला लक्ष्मी दास चोपड़ा प्रसिद्ध एडवोकेट थे, जिन्होंने किसी कारणवश ब्रिटिश ऑफिसर से माफी मांगने से मना कर दिया और तुरंत अपनी नौकरी छोड़ दी।

डोडा में 100 परिवारों तक पहुंचाई गई पहली मदद

इनके पिता लाला जगत नारायण जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी थे, स्वतंत्रता के बाद पंजाब में फैले चरम उग्रवाद के दिनों उनकी हत्या कर दी गई। विजय चोपड़ा कश्मीर में ट्रक भेजने की शुरुआत पर बताते हैं कि शहीदों के एक कार्पाम में जम्मू के तत्कालीन विधायक चमन लाल गुप्ता थे। उन्होंने जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में फैली गरीबी की बात की। इसके तीन-चार दिन बाद उनके दो आदमियों ने एक ट्रक डोडा इलाके में भेजने में सहायता की, जिसमें लगभग 100 परिवारों की जरूरत का सामान था।

इस तरह ट्रक की शुरुआत के बाद से लोग इनके यहां कंबल, अनाज, चावल जैसे सामान रखकर जाने लगे। अभी तो लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, हरियाणा हर जगह से सेवा का कार्य किया जा रहा है। बहुत-सी सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी इससे जुड़ गई हैं। भारत-पाकिस्तान की सीमा पर लगते इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए रोजगार के बारे में पूछने पर वह कहते हैं कि इनकी जिंदगी बहुत ही मुश्किलों भरी है। कारण जब भी युद्ध का अंदेशा होता है, तो आस-पास के सभी गांव खाली करा दिये जाते हैं।

खराब सड़कें, 10 किमी पैदल चलकर लेते हैं राशन

इनकी पकी फसल बर्बाद हो जाती है और पशु भी मारे जाते हैं। ऐसे में ये परिवार हर जरूरत के लिए मोहताज होते हैं। वहीं इन इलाकों में ट्रक का सामान बांटना भी आसान नहीं है। सड़कें बहुत खराब हैं, दुर्गम इलाके हैं, यातायात की सुविधा नहीं होने से मदद लेने वालों को भी दस-दस कि.मी. पैदल चलकर राशन लेने आना पड़ता है। इन परिवारों को क्यों ना स्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर बसा दिया जाए, के सवाल पर वह कहते हैं कि अगर ये इलाके खाली हो गये तो पाकिस्तानियों की मौज हो जाएगी।

स्वाती जैन

पंजाब केसरी ग्रुप अन्य सामाजिक कार्य कर रहा है। समय-समय पर जरूरतमंदों के इलाज के लिए शिविर लगाये जाते हैं, तो वहीं देश में आने वाली हर आपदा में इस समूह ने करोड़ों की मदद देकर अपनी भागीदारी दर्ज की है। विजय चोपड़ा मीडिया के हर बड़े पद पर रह चुकी वो शाख्सियत हैं जिन्होंने देश के प्रति अपने उसूलों से समझौता नहीं किया और पद्मश्री को भी स्वीकार करने से मना कर दिया था।

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