बिना भजन के भव सागर नहीं होता पार : श्री सूर्यप्रकाशजी

हैदराबाद, बिना भजन के कोई भी भव सागर से पार नहीं हो सकता है, क्योंकि प्रभु ही भटके हुए को राह दिखाते हैं।
उक्त उद्गार बेगम बाजार स्थित माहेश्वरी भवन में रिद्धि सिद्धि महिला मंडल द्वारा आयोजित संगीतमय रुक्मिणी मंगल कथा महोत्सव के द्वितीय दिवस कथा का श्रवण करवाते हुए कथा वाचक श्री सूर्यप्रकाशजी ने दिये।

महाराज ने कहा कि पत्र में लिख देना आसान कार्य होता है पर असल में कार्य करना कठिन होता है। कागज के अंदर सामान की लिस्ट पकड़ा देते हैं, पर सामान को लाने वाले की आत्मा ही जानती की कार्य कैसा है। कथा में व्यवस्था के लिए संघर्ष करना पड़ता है। सारा श्रेय रिद्धि सिद्धि महिला मंडल को जाता है। उन्होंने कहा कि सत्संग का अपना आनंद होता है जिसको लगता है उसकी मस्ती अलग होती है। सत्संग हर किसी को प्राप्त नहीं होता है।

जहाँ सत्संग होगा वहां जाए बगैर सत्संगी नहीं रह सकता है। पापी घर से बाहर निकल नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान का सत्संग एक घड़ी या आधी घड़ी नहीं, बल्कि एक बार राम बोलने से हो जाता है। भगवान का सत्संग बहुत ही जरूरी है। महाराज ने कहा कि रुक्मिणी जी कृपा नाथ के चरणों की सेवा करती है। उनका मंगल विवाह शिशुपाल से होने के लिए बारात पहुंची।

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रुक्मिणी ने माता और पिता से शिशुपाल से विवाह न करने की विनती की, पर उसे नहीं सुना गया। रुक्मिणी का भाई रुक्मा चाहता था कि विवाह शिशुपाल से हो। रुक्मिणी ने प्रभु को पत्र लिखकर हरण करने के लिए आग्रह किया। अवसर पर अध्यक्षा दुर्गा ओझा, मंत्री मीना खटोड, उपाध्यक्ष सरला मणियार, संरक्षिका सूरज बिरला, सह-मंत्राणी प्रेमा डोबा, कोषाध्यक्ष रेखा बियाणी, प्रचार मंत्राणी रूपा अग्रवाल, अंकिता वरसानिया, दुर्गा शर्मा, ममता झंवर, मंजू भाटी, पूजा लाहोटी, प्रेमा सोनी, सीमा ओझा, पुष्पा तोतला, आरती शर्मा, बीना कडेल, पूजा पुरोहित, रेणुका शर्मा, अनिता शर्मा व अन्य उपस्थित थे।

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