ये अन्दर की बात है

अपना-अपना तऱीका है, अपने खयालात(1) है।
सोब कू नक्को बोलो, ये अंदर की बात है।।

लोगाँ कू भरोसा नइँ था, पारटी कैसा जीत्को(2) आइ,
थोड़े लोगाँ ये बोलरैं, वोटर कू पैसे खिलाइ।
थोड़ा ये सँइ(3) बी है, थोड़ी हक़ाकत नइँ है,
जंता के दिलाँ में तो लीड्रौं की इज़्ज़त नइँ है।
आज की सियासत(4) के, ऐसे क्यऊँ हालात है,
सोब कू नक्को बोलो, ये अंदर की बात है।।

चौदा फरवरी कू, वेलेन्टाइन डे किये,
चौदा नवम्बर कू, नऊँ म्हैने पूरे हुवे।
चिल्ड्रन्स डे पूरा हुआ, घर में बदली छा गई,
ये क्या हुवा बोल्ले को, अम्मा भौत(5) घबरागइ।
नव्वे जनरेशन(6) के बहक्ते जज़्बात(7) हैं,
सोब कू नक्को बोलो, ये अंदर की बात है।।

आिफस में कलर्क था, जादा नइँ थी इज़्ज़त,
हल्लू-हल्लू लेने लगा, लोगाँ से इन रिश्वत।
आज बड़ा बंग्ला है, काम आ गई हिकमत(8),
करज़दार था पैले(9), आज घरों में दौलत है।
कल तलक फकाट(10) था, पन(11) आज क्या औ़कात(12) है,
सोब कू नक्को बोलो, ये अंदर की बात है।।

कमज़ोरों पो(13) धागाँ दाल्को, करता था दादागिरी,
लीडरों की करने लगा जबसे इन चमचागिरी।
जब से इन सियासत के लोगाँ के काम करराए,
क़ानून से, पोलिस से, किस्से बी(14) नइँ डरराए।
बड़े-बड़े लीडराँ के इस्के सिर पो हात(15) है,
सोब कू नक्को बोलो, ये अंदर की बात है।।

अमन-अमन(16) रटतैं, पन मुलुक के इन दुश्मन है,
रहबर(17) दिस्तै पनकी, सोब से बड़े रहजन(18) है।
अपने सगात ह्रैतै, पन पैछान्ना मुशकिल है,
अपने मुलुक से ग़द्दारी कैसा इनका दिल है।
छुपेवे धैशतरगरदाँ(19), सोब इनके सात(20) है,
सोब कू नक्को बोलो, ये अंदर की बात है।।

नरेंद्र राय

1.विचार, 2.जीतकर, 3.सच, 4.राजनीति, 5.बहुत, 6.नयी पीढ़ी, 7.भावनाएँ, 8.होशियारी, 9.पहले, 10.कंगाल, 11.पर, 12.स्थिति, 13.पर, 14.भी, 15.हाथ, 16.शांन्ति 17.पथ-प्रदर्शक, 18.लुटेरे, 19.आतंकवादी, 20.साथ।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button