आर्थिक सर्वे के मायने
उनतीस जनवरी, 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। यह दस्तावेज पिछले साल की अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर पेश करता है और आने वाले बजट के संकेत देता है। सरल शब्दों में कहें तो यह रिपोर्ट बताती है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियाद पर खड़ी है। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत चौथे साल लगातार सबसे तेजी से बढ़ रहा है। आम नागरिक के लिए इसका मतलब है कि रोजगार, महँगाई पर काबू और आय में बढ़ोतरी की उम्मीद मजबूत हुई है।
सर्वे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि देश की कुल कमाई और उत्पादन में अच्छी तेजी आई है। अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.8 से 7.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। लंबी अवधि में भारत की क्षमता 7 प्रतिशत सालाना विकास की है। ये आँकड़े बताते हैं कि कोरोना के बाद की रिकवरी अब स्थिर हो गई है। आम आदमी के लिए अच्छी खबर यह है कि निजी खपत (यानी घरों में सामान-खाना-कपड़ा खरीदना) 7 प्रतिशत बढ़ी है और यह जीडीपी का 61.5 प्रतिशत है। यानी लोग पहले से ज्यादा खरीद-फरोख्त कर रहे हैं, जो बाजार में रौनक लाता है।
खाद्य और ईंधन कीमतों में गिरावट से बजट संभला
महँगाई की बात करें तो यह सबसे बड़ी राहत वाली खबर है। अप्रैल से दिसंबर 2025 तक औसत खुदरा महँगाई सिर्फ 1.7 प्रतिशत रही। खाने-पीने और ईंधन की कीमतें घटीं, जिससे आम घरों का बजट सँभला। सरकारी आँकड़ों से पता चलता है कि खाद्य और ईंधन महँगाई पर काबू पाने से कुल महँगाई में 1.8 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई। रिजर्व बैंक की सख्त नीति और अच्छी फसल ने इसमें मदद की। आम आदमी के लिए इसका मतलब है कि राशन, सब्जी, दाल-चावल और पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ेंगी, बल्कि स्थिर रहेंगी!
बाहरी मोर्चे पर भी मजबूती दिख रही है। 16 जनवरी 2026 तक विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 अरब डॉलर पहुँच गया, जो 11 महीने के आयात को कवर कर सकता है। यह बफर वैश्विक संकट, जैसे अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध या तेल की कीमतों में उछाल से बचाव देता है। खुश हुआ जा सकता है कि तमाम विपरीतताओं के बीच, निर्यात मजबूत हुए हैं और बैंकिंग सेक्टर भी स्वस्थ है।
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कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में मजबूत प्रगति
गौरतलब है कि कृषि, उद्योग और सेवा तीनों क्षेत्रों में अच्छी प्रगति है। खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा है। पशुपालन और मत्स्य पालन में जबरदस्त उछाल देखा गया। इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर साफ दिखाई देता ही है – हाईवे, एयरपोर्ट, रेल और रिन्यूएबल एनर्जी में बड़े निवेश के रूप में। यह भी हर्ष का विषय है कि पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम से 2 लाख करोड़ निवेश और 12.6 लाख नौकरियाँ बनीं।
सयाने ध्यान दिला रहे हैं कि आर्थिक सर्वेक्षण में अनुशासित स्वदेशी रणनीति की बात की गई है। यह भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा में एक नया मोड़ है, जो अंधाधुंध स्वदेशी के बजाय रणनीतिक और दक्षता आधारित दृष्टिकोण पर आधारित है। इनपुट कॉस्ट कम करने, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और एआई पर जोर दिया गया है। मनरेगा में बड़े बदलाव के संकेत भी हैं। कुल मिलाकर, आम नागरिक के लिए यह सर्वेक्षण आशा की किरण है। महँगाई कम; विकास तेज; नौकरियाँ बढ़ रही हैं। बेशक, वैश्विक मंदी और व्यापार युद्ध की चुनौतियाँ भी अपनी जगह कायम हैं। तो भी, यह रिपोर्ट गवाह है कि भारत तेजी से विकसित हो रहा है। सरकार को अब इस मजबूत नींव पर जनता की आय बढ़ाने, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस करना चाहिए।
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