आज अमावस्या पर करें सत्तू का दान

वैशाख अमावस्या हिंदू पंचांग के अनुसार एक अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है। इस अमावस्या को सतुवाई अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन लोग सात्विक भोजन करते हैं और सत्तू, तिल, गुड़ और जल से पितरों के निमित्त तर्पण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए पितृ कार्यों से घर में सुख-शांति एवं समृद्धि और मानसिक संतोष बना रहता है। इस दिन दान, स्नान और तर्पण का विशेष महत्व होता है। इसी श्रृंखला में इस दिन दीपक जलाना भी शुभ कार्य है, जो पितरों की शांति, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति और घर में सुख-समृद्धि लाता है।
समय का चयन
वैशाख अमावस्या के अवसर पर दीप जलाने के लिए संध्या का समय सबसे अनुकूल माना जाता है। सूर्यास्त के पश्चात, जब अंधेरा छाने लगे, तब घर के मुख्य-द्वार, तुलसी के पौधे और आंगन में दीपक जलाना चाहिए। यह समय पितरों को समर्पित होता है। इस दिन पीतल या मिट्टी का दीपक शुभ माना जाता है। दीपक में तिल का तेल या गाय का घी भरना चाहिए। तिल का तेल पितृ-दोष शांति के लिए विशेष रूप से लाभकारी होता है। दीपक में रुई की बाती का प्रयोग करें, जिसे पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
तुलसी के पास: तुलसी के पौधे के समक्ष दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मुख्य-द्वार : घर के प्रवेश-द्वार पर दीपक जलाने से दरिद्रता और नकारात्मक शक्तियाँ समाप्त होती हैं।
पितरों के लिए: यदि संभव हो तो घर के दक्षिण दिशा में एक दीपक पितरों की शांति के लिए भी जलाएं।
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मंत्र और भाव दीपक जलाते समय ॐ नम शिवाय या ॐ पितृदेवाय नम का जप करें। मन में पितरों की शांति, घर की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। दीपक जलाने से पूर्व संबंधित स्थान की सफाई अवश्य करें। स्वच्छ वातावरण में दीपक जलाने से उसका आध्यात्मिक प्रभाव अधिक होता है। वैशाख अमावस्या पर श्रद्धा और विधिपूर्वक दीपक जलाने से जीवन में शुभता और ऊर्जा का संचार होता है।
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