नर्मदेश्वर का हर कंकड़ है शंकर

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नर्मदा नदी भारत की पवित्र माने जानी वाली नदियों में से एक है। कहा जाता है कि नर्मदा का हर कंकर शंकर है। नर्मदा के तट पर पाए जाने वाले शिवलिंग के आकार के पत्थरों को नर्मदेश्वर शिवलिंग या बाणलिंग कहा जाता है। वहाँ के सभी पत्थर स्वयंभू शिवलिंग माने जाते हैं। इसके पीछे एक कथा है। स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार अमरकंटक में भगवान शिव घोर तपस्या में लीन थे। तप से उनके शरीर से पसीने की बूंदें गिरने लगीं। इन्हीं पसीने की बूंदों से पवित्र नर्मदा नदी की उत्पत्ति हुई।

शिव जी से उत्पत्ति के कारण नर्मदा को शिवप्रिया और शंकरकन्या भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया, तो शिव जी के धनुष से एक अत्यधिक शक्तिशाली और दिव्य बाण नर्मदा नदी के जल में जा गिरा। इसी बाण के तेज से नर्मदा के जल में मौजूद पत्थर शिवलिंग के रूप में परिवर्तित हो गए। इसी कारण नर्मदा से निकलने वाले शिवलिंगों को बाणलिंग भी कहते हैं।

नर्मदा की भक्ति से शिव का वरदान और शिवलिंग का महत्व

कथा के अनुसार, एक बार नर्मदा नदी ने अपनी कठोर तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और यह वरदान मांगा कि मुझे भी गंगा के समान पवित्रता और प्रसिद्धि मिले। ब्रह्मा जी ने कहा कि जब कोई अन्य देवता भगवान शिव और विष्णु जी की बराबरी कर लेगा, तभी कोई दूसरी नदी गंगा के समान पवित्र हो पाएगी।

इस बात को सुनकर नर्मदा ने भगवान शिव की आराधना करनी शुरू कर दी। नर्मदा की इस अटूट भक्ति को देखकर महादेव प्रसन्न हुए और नर्मदा के सामने प्रकट हुए। तब नर्मदा ने भगवान शिव से यह वरदान मांगा कि उनकी भक्ति सदैव शिव के चरणों में बनी रहे। नर्मदा की इस निस्वार्थ और निष्काम भक्ति से शिव शंकर ने उन्हें वरदान दिया कि तुम्हारे तट पर जितने भी पत्थर हैं, वे आज से शिवलिंग कहलाएंगे और पूजे जाएंगे।

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अद्भुत लाभ

अन्य शिवलिंग की तुलना में नर्मदेश्वर शिवलिंग का पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है। नर्मदा तट से निकले शिवलिंगों में स्वयंभू दिव्य ऊर्जा होती है। रोजाना विधि-विधान से नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समफद्धि बनी रहती है।

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मान्यता है कि रोज इस पवित्र शिवलिंग पर जल अर्पित करने और आराधना करने से जीवन के सभी प्रकार के रोग, दोष और कष्ट दूर होते हैं। इस शिवलिंग की एक और खास बात यह है कि सामान्यत शिवलिंग पर चढ़ी वस्तु ग्रहण नहीं की जाती, लेकिन नर्मदेश्वर शिवलिंग का प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है।

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