टार्गेट से अधिक जरूरी ग्राहक सुरक्षा : सज्जनार

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हैदराबाद, नगर पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने बैंक अधिकारियों को सुझाव दिया कि सिर्फ बैंक खाता प्रारंभ करने के लक्ष्य का पीछा नहीं करना चाहिए, बल्कि ग्राहकों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने बैंक अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि उनके बैंक का एक भी ग्राहक साइबर अपराध का शिकार न हो और यही उनका पहला मकसद होना चाहिए।

यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि पुलिस आयुक्त ने बंजारा हिल्स स्थित कमान कंट्रोल सेंटर में बैंक अधिकारियों के साथ बैठक कर म्यूल अकाउंट को नियंत्रित करने को लेकर चर्चा की। इस समीक्षा बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक चिन्मय कुमार, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त एम. श्रीनिवासुलू के अलावा 45 सरकारी और 75 निजी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक को संबोधित करते हुए सज्जनार ने बैंक प्रबंधन से सेफ कस्टमर चैलेंज अपनाने का सुझाव दिया, जिससे कि साइबर अपराधियों की मदद करने वाले म्यूल अकाउंट पर लगाम लगाई जा सके।

हर शाखा को जीरो म्यूल अकाउंट लक्ष्य अपनाने का सुझाव

इसी क्रम में उन्होंने सुझाव दिया कि बैंक की हर शाखा को जीरो म्यूल अकाउंट के लक्ष्य के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी बैंक शाखा में कोई साइबर अपराध का शिकार नहीं होना चाहिए और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरबी) में दर्ज शिकायतों के आधार पर संबंधित बैंक शाखाओं को चाहिए कि वे अपने परफार्मेंस का आकलन करें और ग्राहकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें।

सज्जनार ने बैंक प्रबंधन को एक और सुझाव दिया कि वे ग्राहक सुरक्षा को कर्मचारियों की परफार्मेंस इंडिकेटर्स के रूप में देखें न कि बैंक खातों की संख्या बढ़ाने के रूप में। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन ऑक्टोपस 2 के तहत 850 साइबर अपराध के मामले में 150 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पता चला और म्यूल अकाउंट खोलने में सहयोग देने वाले 32 बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया।

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विदेशों से संचालित साइबर गिरोहों की बढ़ती साजिश

सज्जनार ने बताया कि कम्बोडिया, वियतनाम और दुबई जैसे देशों से संचालन करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह स्थानीय बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर साइबर अपराध को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि केवाईसी नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ न केवल सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, बल्कि उन्हें बैंकिंग क्षेत्र से ही ब्लैक लिस्ट कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर बैंकों में म्यूल अकाउंट का पता चलता है, तो इस संबंध में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सज्जनार ने बैंकों को उन ग्राहकों के बारे में सतर्क रहना चाहिए, जो फिक्स डिपॉजिट जल्दी बंद करवाने आते हैं। इस मामले में यह देखना चाहिए कि क्या वे साइबर अपराधियों के दबाव में आकर बड़े पैमाने पर बैंक से पैसा निकाल रहे हैं। ऐसे ग्राहकों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और उन्हें बचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंकरों को सलाह दी जानी चाहिए कि वे म्यूल अकाउंट की पहचान करने के लिए म्यूल हंटर जैसे मॉडर्न टेक्नोलॉजिकल टूल्स का इस्तेमाल करें और ग्राहकों में 1930 हेल्प लाइन नंबर के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करें।

सज्जनार ने कहा कि ऑपरेशन ऑक्टोपस तब तक जारी रहेगा, जब तक साइबर अपराधियों का नेटवर्क खत्म नहीं हो जाता है। इस संदर्भ में बैंकों को पुलिस के साथ मिलकर काम करना चाहिए। इस बैठक में साइबर अपराध पुलिस उपायुक्त अरविंद बाबू और एसीपी शिवा मारुति उपस्थित थे।

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