कालेश्वरम पर सीबीआई निदेशक से मिलेंगे रेवंत रेड्डी
हैदराबाद, राज्य मंत्रिमंडल ने कालेश्वरम परियोजना में हुई अनियमितताओं, खामियों और अवैध क्रियाकलापों की जाँच में तेजी लाने का अनुरोध सीबीआई से एक बार फिर करने का निर्णय लिया है। मंत्रिमंडल ने कालेश्वरम पर जस्टिस पीसी घोष आयोग की रिपोर्ट पर राज्य उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले की पूरी तरह समीक्षा कर दिल्ली में कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श करने के बाद इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने या नहीं जाने पर फैसला लेने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में सचिवालय में मंत्रिमंडल की बैठक हुई। तत्पश्चात मंत्रियों उत्तम कुमार रेड्डी, पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी और वाकिटी श्रीहरि ने संवाददाताओं से बातचीत कर बैठक में लिये गये निर्णयों की जानकारी दी। उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि बहुत जल्द सीएम रेवंत रेड्डी और वे स्वयं सीबीआई निदेशक से व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे और कालेश्वरम परियोजना पर कैग, राष्ट्रीय डैम सुरक्षा प्राधिकरण और विजिलेंस की रिपोर्ट सौंपकर जांच शुरू करने का अनुरोध करेंगे।
हाईकोर्ट ने आयोग की नियुक्ति को सही माना
उत्तम कुमार रेड्डी ने बताया कि पहले भी जांच की मांग की गई थी, लेकिन 9 महीने बीत जाने के बावजूद सीबीआई जांच अभी तक शुरू नहीं हुई है। उन्होंने आगे कहा कि कालेश्वरम पर जस्टिस पीसी घोष न्यायिक आयोग की नियुक्ति को उच्च न्यायालय ने गलत नहीं ठहराया है। आयोग की रिपोर्ट को भी खारिज नहीं किया है। न्यायिक आयोग का गठन कानूनी और संवैधानिक रूप से सही है, ऐसा भी न्यायालय ने माना है।
केवल कुछ तकनीकी कारणों को ही न्यायालय ने गलत बताया। उन्होंने यह भी कहा कि कालेश्वरम मामले में केसीआर और हरीश राव को न्यायालय ने निर्दोष घोषित नहीं किया है। इसके बावजूद बीआरएस नेताओं का जश्न मनाना अजीब है। उन्होंने कहा कि अतीत में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा तुम्मिड़िहट्टी के पास शुरू की गई प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना को कालेश्वरम में स्थानांतरित करने के कारण राज्य पर हर साल 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने दोहराया कि लगभग एक लाख करोड़ रुपये के प्रजा धन से बने कालेश्वरम परियोजना में क्षतिग्रस्त तीन बैराजों को हम ऐसे ही नहीं छोड़े देंगे। इन बैराजों की मरम्मत कर किसानों को पानी दिया जाएगा।
100 दिनों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया का भुगतान
पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि मंत्रिमंडल ने 100 दिनों के भीतर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले 10 साल सत्ता में रही पिछली सरकार ने कर्मचारियों से संबंधित हजारों करोड़ रुपये के बिल लंबित रखे थे। उन्होंने कहा कि तेलंगाना बनने के समय एक भी रुपया बकाया नहीं था, लेकिन सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दी जाने वाले राशि न देने के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारी, पेंशनरों और उनके परिवार कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इस पर मंत्रिमंडल ने गंभीर चिंता व्यक्त की।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कार्यालयों और सचिवालय के चक्कर लगाने की स्थिति न आए, इसके लिए उनके बकाया भुगतान के लिए तुरंत कदम उठाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि नियमित कर्मचारियों के 6,200 करोड़ रुपये और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के 8 हजार करोड़ रुपये बकाया हैं। राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए इन्हें तुरंत देना संभव नहीं है, लेकिन वैकल्पिक रास्ता खोज कर आवश्यक धन की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है।
आवश्यकता पड़ने पर मंत्रियों ने अपने वेतन की 50 प्रतिशत राशि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को देने के लिए भी सहमति जताई है। रिसोर्स मोबिलाइजेशन पर गठित मंत्रिमंडल उप-समिति को निर्देश दिया गया है कि वह तुरंत कर्मचारी, शिक्षक और सेवानिवृत्त कर्मचारी संघों तथा संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकाले। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल की अगली बैठक 4 मई को होगी और उस बैठक में सौ दिनों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया राशि का भुगतान से संबंधित शेड्यूल घोषित किया जाएगा।
गच्चीबावली स्टेडियम का विकास पीपीपी मॉडल पर
इसके अलावा पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि गच्चीबावली स्टेडियम को सार्वजनिक व निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल में विकसित करने के प्रस्ताव को भी बैठक में मंजूरी दी गयी है। वर्तमान के 76 एकड़ में से 64 एकड़ में 21 प्रकार की खेल सुविधाएँ विकसित करने के साथ आउटडोर स्टेडियम की क्षमता 20 हजार से बढ़ाकर 50 हजार करने का निर्णय लिया गया है।
स्विमिंग पूल की क्षमता बढ़ाने के साथ स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना, खिलाड़ियों के लिए आवास और प्रशिक्षण सुविधाएँ प्रदान करने को भी मंजूरी दी गई है। शेष 12 एकड़ डेवलपर्स को देकर व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित करने की अनुमति दी जाएगी और उससे प्राप्त आय का उपयोग स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के संचालन, खिलाड़ियों के आवास और प्रशिक्षण सहित अन्य कार्यक्रमों के लिए किया जाएगा।
यह भी पढ़ें… हैदराबाद : खाद्य पदार्थों में मिलावट के 22 मामले दर्ज
चिन्ना-कालेश्वरम परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का निर्णय
इसके अलावा बैठक में मंथनी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की लंबित मांग चिन्ना- कालेश्वरम परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा करने का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना से महादेवपुर, काटारम, मल्हर राव, महामुत्तारम मंडलों में लगभग 45 हजार एकड़ और 63 गाँवों के लोगों को लाभ होगा। भूमि अधिग्रहण में हुए विलंब के कारण यह परियोजना पूरी नहीं हुई। इस परियोजना के लिए लगभग 2,427 एकड़ भूमि की आवश्यकता है।
अब तक 1,020 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया है। शेष भूमि के अधिग्रहण के लिए आवश्यक 166.67 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को बैठक में मंजूरी दी गयी। साथ ही श्रीपाद एल्लमपल्ली परियोजना के आसपास मंचिरियाल जिले के हाजीपुर राजस्व क्षेत्र की परिधि में एक इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क की स्थापना को भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। सिंचाई विभाग की 85.10 एकड़ भूमि मत्स्य विभाग को आवंटित करने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने आगे बताया कि इस बैठक में राज्य में कार्यकाल पूरा कर चुकी प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस) के लिए मनोनीत पद्धति से प्रबंधन समितियों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई है।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।





