जब बोले अंतरात्मा की आवाज़
हम अपने दैनिक जीवन में अक्सर देखते हैं कि दरवाजे की घंटी बजते ही हमारे मन में यह ख्याल आता है कि इस समय दरवाजे पर अमुक व्यक्ति ही होगा और दरवाजा खोलने पर जिसका हमें ख्याल आया था, वही व्यक्ति होता है। इस प्रकार कभी-कभी हम अपने किसी मित्र से मिलने के लिए उसके घर पर जा रहे होते हैं कि अचानक दिमाग में विचार कौंधता है कि इस समय दोस्त के यहां जाना व्यर्थ होगा, वह नहीं मिलेगा, परंतु हम नहीं मानते और चल पड़ते हैं और वाकई में दोस्त हमें नहीं मिलता।
ऐसा भी होता है कि किसी रिश्तेदार या अभिन्न मित्र का ख्याल हमें बार-बार आता है और हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि ऐसा क्यों हो रहा है? तभी उस दोस्त या रिश्तेदार के साथ कोई हादसा होने की खबर मिलती है। क्या यह सब संयोग है?
नहीं, यह संयोग नहीं है। आम भाषा में इसे अंतरात्मा की आवाज़ कहा जाता है। अनुभवियों का मानना है कि यह आवाज़ सभी के लिए कार्य करती है।
सवाल सिर्फ इसको समझने और पहचानने का है तथा इस पर अटूट विश्वास करने पर ही और अभ्यास से इसे समझा तथा पहचाना जा सकता है। यह आंतरिक शक्ति हमें अच्छाई और बुराई का ज्ञान कराती है। उदाहरण के लिए, रास्ते में आपको एक सौ का नोट पड़ा मिलता है तो आप उसे तुरंत रख लेते हैं। आंतरिक शक्ति आपको बताती है कि यह ठीक नहीं है, परंतु आप उस पर ध्यान नहीं देते।
अंतरात्मा की आवाज़: सही फैसलों की राह
बात वही विश्वास की है। यदि आप इस पर विश्वास करेंगे तो आपकी अंतरात्मा की आवाज भी उतनी ही विकसित होगी और आप उसका अनुसरण करके बहुत लाभ उठा सकते हैं। ध्यान रहे, अंतरात्मा की आवाज़ ईश्वरीय प्रदत्त संकेत है जिसमें हमारी आत्मा माध्यम है। इसको पूर्णत जागृत करने के लिए विश्वास के अतिरिक्त मस्तिष्क में जब भी किसी प्रकार का विचार आए तो गंभीरता से यह जानने का प्रयत्न करें कि यह विचार अचानक क्यों उत्पन्न हुआ।
उसको परखें तो आपको जागृत करने में आसानी होगी। जैसे आप अमुक कार्य करने जा रहे हैं तो ख्याल आता है कि इसे अभी न करें, चार दिन बाद करें तो इसे गंभीरता से लेते हुए चार दिन बाद करें तो आप देखेंगे कि वह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो जाता है। यदि आप ईश्वर में विश्वास रखते हैं, तो यह तय है कि आपकी अंतरात्मा की आवाज़ शीघ्र जाग्रत होगी।
यह भी पढ़े : सहयोग है भविष्य की शक्ति
ज्यों-ज्यों आपका विश्वास बढ़ेगा, त्यों-त्यों आपकी अंतरात्मा की आवाज़ जागृत होगी। विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिक इसे छठी इन्द्रिय और सुपर चेतना का नाम देते हैं। अन्त में, मैं यही कहूंगा कि यदि आप अपने भीतर की अंतरात्मा की आवाज़ के अस्तित्व का एहसास करें और इसे जागृत करें तो आज के आपाधापी के युग में आप स्वयं को औरों से अलग पाएँगे और श्रेष्ठ जीवन व्यतीत करने हेतु समर्थ हो सकेंगे।
राजीव अग्रवाल
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



