अक्षय आनंद का स्रोत है अक्षय तृतीया

ब्रह्मांड में ब्रह्म, चेतना या ऊर्जा के अतिरिक्त कुछ भी शाश्वत नहीं है। संसार का कोई भी व्यक्ति, वस्तु, रिश्ता, मित्र, संबंध, परिस्थिति, धन-संपदा, पद – प्रतिष्ठा आदि हमें निरंतर सुख नहीं दे सकते, क्योंकि सब कुछ अस्थाई और नश्वर है। लेकिन अज्ञानतावश हम संसार की नश्वर चीजों से शाश्वत सुख पाना चाहते हैं इसीलिए हम जीवन भर इनको हासिल करने के लिए संघर्ष करते रहते हैं, परंतु ये चीजें हासिल होने पर भी हमें तृप्ति या आनंद की अनुभूति नहीं होती।
केवल सुख मिलता है और वह भी कुछ समय के लिए, सदा के लिए नहीं। इस वर्ष अक्षय तृतीया पर यदि हम इस ज्ञान पर ध्यान दें कि सृष्टि में वास्तव में अक्षय क्या है? जो कभी नष्ट नहीं होता, तब हमें समझ में आता है कि आत्मा या चेतना हमारा शरीर न होने पर भी सूक्ष्म रूप में ब्रह्मांड में है, शरीर होने पर भी है और शरीर ना होने पर भी रहेगी।
इसका अर्थ है कि चेतना सदा और हर काल में रहती है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि चेतना किसी भी आकार – प्रकार या रंग – रूप तक सीमित नहीं है। सृष्टि के प्रत्येक कण में यह अत्यंत सूक्ष्म रूप में उपस्थित है। चेतना ब्रह्मांडीय शक्ति का एक रूप है, इसीलिए यह सर्वशक्तिमान है।
अक्षय आनंद का रहस्य: हर पल में छुपी चेतना को पहचानें
यदि हमें जीवन में हर पल अक्षय आनंद की अनुभूति करनी है तो अपने हर कार्य, व्यवहार और दृष्टि में आने वाले जड़ – चेतन में छुपी चेतना या ब्रह्म को महसूस करना होगा। साधारण तौर पर अक्षय तृतीया के दिन सोना- चांदी खरीदने, मंत्र जाप करने, दान, कर्मकांड पूजा पाठ आदि करने की परंपरा रही है लेकिन इन सब सांसारिक रीति – रिवाजों का पालन करने मात्र से हम पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त उस अक्षय तत्व से कभी नहीं जुड़ पाते हैं, जिससे जुड़ने के लिए हमें मानव जन्म मिला है।
दैनिक जीवन में उठते – बैठते, खाते – पीते, सेते – जागते, कार्य करते समय हर पल यदि उस अखंड अक्षय चेतना के भाव में रहते हैं तब वास्तव में हम जीवित रहते हुए भी अक्षय आनंद की अनुभूति करते हैं और अंत में उस अक्षय अनंत चेतना में ही लीन हो जाते हैं।

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अक्षय तृतीया को शुभ कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है। सच यह है कि जो जीवात्मा परमात्मा के अक्षय भाव से जुड़ी रहती है, उसके लिए हर पल ही अबूझ मुहूर्त है और हर दिन अक्षय तृतीया। आध्यात्मिक रहस्य है कि गुरु तत्व अक्षय तत्व है और गुरु की शरणागति व संगति अक्षय तृतीया का अक्षय ज्ञान और फल देती है, प्रयास करके इसका लाभ अवश्य लेना है।
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