लगचर्ला मामले में अत्याचार उजागर

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हैदराबाद, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की जांच प्रभाग टीम ने 11 नवंबर, 2024 को लगचर्ला में हुई हिंसा की जांच की, जिसमें कांग्रेस सरकार द्वारा प्रस्तावित फार्मा विलेज के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण करने का प्रयास किया गया था। टीम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, रात में गिरफ्तार किए गए ग्रामीणों को पारिगी पुलिस स्टेशन में पीटा गया और उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पिटाई के बारे में न बोलने की धमकी भी दी गई।

इसमें कहा गया कि ग्रामीणों को थाने में रखा गया था, लेकिन जीडी प्रविष्टि में यह नहीं बताया गया। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि कई लोग जो न तो मौके पर थे और न ही किसी विरोध प्रदर्शन में गए थे और उनकी जमीन भी परियोजना के कारण प्रभावित नहीं हुई, उन्हें भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कानूनी प्रावधानों और दिशा-निर्देशों का पालन न करने के मामले में पुलिस की ओर से चूक देखी गई है, क्योंकि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी लोगों ने कहा है कि उन्हें शारीरिक यातना दी गई और न्यायिक अधिकारी के सामने इस बारे में न बताने की धमकी दी गई।

सरकारी एजेंसियों द्वारा कानून के अनुसार अधिग्रहण का आदेश जारी किया गया था। पुलिस अधिकारियों द्वारा अपनाई गई कार्रवाई का तरीका कानून के अनुसार नहीं था। रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकअप और सीआई कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे, साथ ही जीडी प्रविष्टियों को अपडेट नहीं किया गया था, जो पुलिस कर्मियों के लापरवाह रवैये को दर्शाता है। हालांकि, सबसे खास बात यह है कि एनएचआरसी ने स्पष्ट रूप से राजनीतिक प्रतिशोध के पहलू का उल्लेख किया है, जिस पर बीआरएस ने बार-बार ध्यान दिलाया था।

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राजनीतिक बदले की कार्रवाई पर आयोग की सख्ती

रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह ध्यान देने योग्य है कि जांच के दौरान राजनीतिक प्रतिशोध का पहलू भी सामने आया। गैर-सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के समर्थक ग्रामीणों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। कुछ ऐसे लोग जिनका घटना से कोई लेना-देना नहीं था, उन्हें भी इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वे दूसरे राजनीतिक दल के समर्थक थे।

नाबालिगों, छात्रों, सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए, जिनमें से कुछ तो 11 नवंबर, 2024 को घटना के दौरान गांव में मौजूद भी नहीं थे। जांच प्रभाग टीम के निष्कर्षों के मद्देनजर, तेलंगाना के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को तीन पहलुओं पर छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। पहला यह कि निर्दोष ग्रामीणों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए जिन्होंने सरकारी अधिकारियों पर हमला नहीं किया है।

दूसरा यह कि लोगों की आजीविका से सीधे जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण विषयों से निपटने वाले पुलिस या नागरिक अधिकारियों को समझदारी से काम लेने का निर्देश दिया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो। आयोग ने कहा, प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र के लोगों के बीच भयमुक्त और निष्पक्ष माहौल बनाए। इसलिए सत्ता का दुरुपयोग, अत्यधिक बल का प्रयोग और नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। आयोग ने इस संबंध में कार्रवाई शुरू करने को भी कहा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

किसानों से रेवंत बिना शर्त माफी मांगें : केटीआर

भारत राष्ट्र समिति (भारास) कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री कल्वाकुंट्ला तारक रामाराव ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को लगचर्ला के गिरिजन किसानों व महिलाओं से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। केटीआर ने एक्स पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को धन्यवाद दिया और कहा कि आयोग ने लगचर्ला में गिरिजन किसानों व महिलाओं पर पुलिस की बर्बरता को तीव्र मानव अधिकारों का उल्लंघन बताया है और यही बात बीआरएस भी पिछले लंबे समय से कहती आ रही है।

उन्होंने कहा कि सत्ता में बने रहने वाले यदि समझते हैं कि वे संविधान से ऊपर हैं तो उनके लिए मानव अधिकार आयोग की रिपोर्ट चेतावनी है। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती हैं लेकिन सत्ता का दुरुपयोग नहीं सहा जाएगा।

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