बीआईएस जागरूकता कार्यशाला : एमएसएमई को मिला मार्गदर्शन

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हैदराबाद, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), हैदराबाद शाखा कार्यालय द्वारा असोसिएशन ऑफ लेडी एंटरप्रेन्योर्स ऑफ इंडिया (एएलईएपी ) के सहयोग से एमएसएमई, स्टार्टअप्स एवं इच्छुक उद्योगों के लिए जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 50 उद्यमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीआईएस हैदराबाद शाखा कार्यालय के निदेशक एवं प्रमुख पी.वी. श्रीकांत ने कहा कि बीआईएस प्रमाणन उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाने, उत्पादों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने तथा व्यवसाय की दीर्घकालिक सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि भारतीय मानकों का पालन करने से उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है, जिससे एमएसएमई को प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में मजबूत पहचान बनाने में सहायता मिलती है।

श्रीकांत ने बताया कि भारत सरकार द्वारा 750 से अधिक उत्पादों को गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओएस) के अंतर्गत अनिवार्य प्रमाणन में शामिल किया गया, जिसके तहत इन उत्पादों का निर्माण, भंडारण, विक्रय या वितरण बीआईएस प्रमाणन के बिना नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उद्योगों को नियमों का पालन करना चाहिए।

बीआईएस लाइसेंस प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि लाइसेंस प्राप्त करने के बाद निर्माता अपने उत्पादों पर आईएसआई मार्क का उपयोग कर सकते हैं, जो गुणवत्ता और विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में उत्पाद का परीक्षण, फैक्ट्री निरीक्षण तथा निर्धारित मानकों का अनुपालन शामिल है, जिसके बाद गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी की जाती है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए बीआईएस प्रमाणन ब्रांड वैल्यू बढ़ाने, बाजार में स्वीकृति प्राप्त करने, उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने तथा सरकारी खरीद और निर्यात के अवसरों को बढ़ाने में अत्यंत सहायक है।

आईएसआई मार्क: उपभोक्ताओं के लिए गुणवत्ता का भरोसा

श्रीकांत ने बताया कि आईएसआई मार्क उपभोक्ताओं के लिए एक भरोसेमंद संकेत है, विशेषकर नए उद्योगों के लिए, क्योंकि यह उत्पाद की गुणवत्ता की गारंटी प्रदान करता है। उन्होंने उद्योगों से अपील की कि वह स्वैच्छिक प्रमाणन योजनाओं के अंतर्गत प्रमाणन प्राप्त करें। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक एवं आईटी उत्पादों के लिए अनिवार्य पंजीकरण योजना (सीआरएस) के महत्व पर प्रकाश डाला, जिसके अंतर्गत उत्पादों को बाजार में लाने से पहले बीआईएस में पंजीकरण कराना आवश्यक है।

इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानक उत्पाद प्राप्त होते हैं। उन्होंने सोने एवं चाँदी के आभूषणों की बीआईएस हॉलमार्किंग के बारे में बताया, जो आभूषणों की शुद्धता सुनिश्चित कर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करती है। विवेक प्रकाश ने बीआईएस की गतिविधियों, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों, लाइसेंसिंग प्रक्रिया, सीआरएस पंजीकरण तथा हॉलमार्किंग प्रावधानों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। प्रतिभागियों को बीआईएस केयर मोबाइल ऐप के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई।

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अवसर पर एएलईएपी की अध्यक्ष रामादेवी, अन्य अधिकारी एवं उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने बीआईएस अधिकारियों के साथ संवाद कर जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन भारत में मजबूत गुणवत्ता पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण हेतु उद्योगों के सहयोग के आह्वान के साथ हुआ।

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