बजट 2026 : उम्मीद और हकीकत के बीच की फॉक
एक फरवरी, 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश केंद्रीय बजट 2026-27 ने विकास की निरंतर गति पर जोर दिया है। कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ का प्रस्तावित है, जिसमें पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ किया गया है। पिछले वर्ष के 11.2 लाख करोड़ से करीब 10 प्रतिशत की यह वृद्धि काफी अहम है। फिस्कल डेफिसिट 4.3 प्रतिशत पर लक्षित है। बेशक, यह बजट ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प को मजबूत करता है। लेकिन, आम आदमी के नजरिये से देखें तो उम्मीदों के साथ कुछ निराशाएँ भी दीखती ही हैं!
सयानों की मानें तो, सकारात्मक पक्ष में कैपेक्स की बढ़ोतरी सबसे मजबूत है। इससे सड़कें, रेलवे, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, जो निर्माण क्षेत्र में लाखों नौकरियाँ पैदा करेगा। एमएसएमई को मजबूत करने के लिए 10,000 करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड और सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड में 2,000 करोड़ का टॉप-अप आस बँधाते हैं। माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए क्रेडिट गारंटी 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ की गई है। इसके अलावा, फर्स्ट-टाइम एंटरप्रेन्योर्स (महिलाओं, एससी/एसटी) के लिए 2 करोड़ तक लोन की योजना छोटे कारोबारियों को राहत देगी।
गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी स्कीम बड़ी राहत
कृषि में दालों पर आत्मनिर्भरता, हाई-यील्डिंग सीड्स और फसल, पशुपालन और मत्स्यपालन के लिए बेहतर लोन (3 लाख से 5 लाख) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। स्वास्थ्य में कैंसर सेंटर्स, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का विस्तार और खासकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म वर्कर्स (गिग वर्कर्स) के लिए सोशल सिक्योरिटी स्कीम आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण कदम है। इसमें ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन, आईडेंटिटी कार्ड और पीएम जन आरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य कवरेज शामिल है। इससे करीब 1 करोड़ गिग वर्कर्स को स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा प्राप्त हो सकेगी।
यह युवा और अनौपचारिक सेक्टर के लिए बड़ी राहत है। एआई, सेमी कंडक्टर्स, रेयर अर्थ और बायोफार्मा पर फोकस से भविष्य में नौकरियाँ पैदा होंगी। फिस्कल डिसिप्लिन से इन्फ्लेशन नियंत्रित रहेगा, जो मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बचाएगा। इस लिहाज से यह कहना गलत नहीं होगा कि बजट लंबी अवधि के विकास, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा पर केंद्रित है। इसके बावजूद, आम आदमी के लिए निराशाजनक पहलू भी कुछ कम नहीं। इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ।
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टैक्स राहत न मिलने से मध्यम वर्ग की उम्मीदें टूटीं
महँगाई के दौर में मध्यम वर्ग पहले से दबाव में है, टैक्स राहत की उसकी उम्मीद टूट गई। स्टैंडर्ड डिडक्शन या रिबेट में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं। सैलरीड क्लास को तत्काल लाभ नहीं मिला। नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 से प्रक्रियागत सुधार आएँगे; लेकिन आम नागरिक के लिए तत्काल राहत शून्य है! कोई बड़ा पॉपुलिस्ट ऐलान – मुफ्त राशन विस्तार, ईंधन सब्सिडी या महँगाई भत्ते में बढ़ोतरी – भी नहीं है।
रोजगार पर स्किलिंग और एमएसएमई जोर तो है, लेकिन गुणवत्ता वाली नौकरियों और वेतन वृद्धि का स्पष्ट रोडमैप नहीं। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और कम आय सबसे बड़ी समस्या है। वहाँ डायरेक्ट इनकम सपोर्ट या रोजगार गारंटी का बड़ा विस्तार नहीं हुआ। गिग वर्कर्स की सोशल सिक्योरिटी सराहनीय है, लेकिन यह अभी शुरुआती कदम है। पूर्ण पेंशन या बेरोजगारी भत्ता जैसी गहरी सुरक्षा नहीं। स्वास्थ्य और शिक्षा पर आवंटन बढ़ा है, लेकिन मेडिकल खर्च और स्कूल फीस की मार बरकरार रहेगी।
समग्र रूप से, यह बजट जिम्मेदार और दूरदर्शी है, जो आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाता है – खासकर गिग वर्कर्स और छोटे कारोबारियों के लिए। लेकिन इसका फोकस आम आदमी की तात्कालिक जरूरतों से ज्यादा भविष्य की नींव पर केंद्रित है। नीति-निर्माताओं को ध्यान में रखना होगा कि जब तक आम आदमी की जेब में पैसा नहीं आएगा, तब तक विकसित भारत का सपना अधूरा लगेगा।
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