आसन पर आरोप लगा रही बीआरएस पर सभापति ठोस कदम उठाएँ : श्रीधर बाबू
हैदराबाद, विधानसभा के शीतकालीन सत्र का बहिष्कार कर सदन में मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (भारास) की अनुपस्थित पर घोर आपत्ति जताते हुए विधायी मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने कहा कि सदन सलाहकार समिति (बीएसी) में बड़ी-बड़ी बातें करने वाली बीआरएस की जनसमस्याओं पर कितनी कटिबद्धता है, यह इससे पता चलता है।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायी मामलों के मंत्री श्रीधर बाबू ने भारास विधायक दल के उपनेता टी. हरीश राव द्वारा जीएचएमसी से संबंधित लिखित में पूछे गए प्रश्न का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रश्न पूछकर सदन में अनुपस्थित होना बीआरएस की कटिबद्धता जनता के प्रति कितनी है, यह पता चलता है।
मंत्री ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी सरकार द्वारा विधानसभा में कृष्णा नदी जल पर दिए गए पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (पीपीपी) में मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (भारास) के अनुपस्थित होने तथा पूर्व मंत्री टी. हरीश राव द्वारा तेलंगाना भवन में कृष्णा जल पर पीपीपी दिए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि सदन में प्रश्न किए जाने के बजाए बाहर जाकर सभापति पर उंगली उठाना कहाँ तक सही है। उन्होंने सभापति की आलोचना किए जाने के एवज में बीआरएस पर कड़ी कार्रवाई करने की अध्यक्ष से माँग की। उन्होंने बीएसी के बैठक में विधानसभा 15 दिन चलाने की बीआरएस की माँग का परोक्ष रूप से उल्लेख किया।
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श्रीधर बाबू ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार ने वर्ष 2024-25 व 2026 में जीएचएमसी के माध्यम से 1 रुपया भी कर्ज नहीं लिया, जबकि पूर्व केसीआर सरकार ने जीएचएमसी के माध्यम से 1,363 करोड़ रुपये कर्ज लिया। उन्होंने कहा कि गत वर्ष 31 दिसंबर, 2025 तक जीएजएमसी पर कुल बकाया कर्ज 4,717.81 करोड़ रुपये है।
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