एआईजी हॉस्पिटल्स में की गयी जटिल क्रोनिक लिवर सर्जरी

हैदराबाद, न्यूनतम इनवेसिव रोबोटिक यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं में एक मील का पत्थर हासिल करते हुए एआईजी हॉस्पिटल्स के यूरोलॉजिस्टों ने आंध्रा प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में क्रोनिक लिवर डिजीज (सीएलडी) के एक मरीज के गुर्दे के ट्यूमर के लिए पहली बार रोबोटिक रेट्रोपेरिटोनियल आंशिक नेफरेक्टोमी चिकित्सा को सफलतापूर्वक पूरा किया।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जटिल और उच्च परिशुद्धता वाली सर्जरी एआईजी हॉस्पिटल्स के यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांटेशन के निदेशक और एचओडी डॉ. बिपिन चंद्रपाल की टीम द्वारा की गई। 45 वर्षीय महिला रोगी, जिसे सीएलडी और जलोदर (पेट में तरल पदार्थ का निर्माण) का ज्ञात इतिहास है, के उच्च-रिज़ॉल्यूशन कंट्रास्ट-एन्हांस्ड सीटी स्कैन सहित एक विस्तफत मूल्यांकन से दाहिने गुर्दे में कैंसरयुक्त ट्यूमर पाया गया।

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डॉ. बिपिन चंद्र पाल ने बताया कि जलोदर द्रव, नाजुक यवफढत संरचना और आसपास की आंतों की संरचनाओं के लिए जोखिम के कारण पारंपरिक ट्रांसपेरिटोनियल (उदर) लेप्रोस्कोपिक या रोबोटिक मार्ग को खारिज कर दिया। और उन्नत रोबोटिक सिस्टम का उपयोग करते हुए सर्जिकल टीम ने इस सीमित क्षेत्र में सावधानीपूर्वक ऑपरेशन किया और आस-पास के अंगों की रक्षा करते हुए ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाया।

एआईजी हॉस्पिटल्स के हेपेटोलॉजी के निदेशक और एचओडी डॉ. मिथुन शर्मा ने कहा कि रोगी लिवर सिरोसिस से लिवर स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकता है। सिरोसिस वाले लोगों को सर्जरी के दौरान बहुत अधिक जोखिमों का सामना करना पड़ता है, जिसमें जटिलताएं, संक्रमण और धीमी रिकवरी शामिल हैं। रोबोटिक रेट्रोपेरिटोनियल दृष्टिकोण सर्जन को मुख्य उदर गुहा में प्रवेश किए बिना न्यूनतम आक्रमण के साथ ऑपरेशन किया जा सकता है।

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