एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण पर सम्मेलन आयोजित

2030 तक तेलंगाना बनेगा देश की एयरोस्पेस और रक्षा राजधानी : उत्तम कुमार रेड्डी

हैदराबाद, फेडरेशन ऑफ तेलंगाना चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफटीसीसीआई) द्वारा आज तेलंगाना सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सहयोग से ‘एमएसएमई स्पार्क 3.0-एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण’ विषयक सम्मेलन का आयोजन किया गया।

बंजारा हिल्स स्थित ताज डेक्कन में आयोजित कार्यक्रम में भारत के एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में उभरते अवसरों पर विचार-विमर्श करने के लिए चार सौ से अधिक नीति निर्माता, रक्षा विशेषज्ञ, उद्योगपति, नवोन्मेषक, निवेशक, स्टार्टअप और एमएसएमई एक मंच पर आए। सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य के सिचाई मंत्री कैप्टन एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना सरकार ने अपनी औद्योगिक नीति के तहत एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया है।

तेलंगाना एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य के रूप में अपनी मजबूत स्थिति स्थापित कर रहा है। इसके चलते 2030 तक तेलंगाना भारत की एयरोस्पेस और रक्षा राजधानी भी बन जाएगा। हैदराबाद को विश्व के सबसे किफायती एयरोस्पेस केंद्रों में से एक बताते हुए उन्होंने शहर के समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रकाश डाला, जिसमें रक्षा प्रयोगशालाएँ, अनुसंधान संस्थान, उन्नत विनिर्माण सुविधाएं तथा लघु एवं मध्यम उद्यम आधार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में वर्तमान में लगभग 1,500 एमएसएमई एयरोस्पेस और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं।

ऑपरेशन सिंदूर ने दिखायी भारत की स्वदेशी रक्षा ताकत: सतीश रेड्डी

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने अवसर पर कहा कि यह सम्मेलन ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगाँठ के साथ मेल खाने वाला है, जिसने दुनिया को भारत की स्वदेशी रूप से विकसित रक्षा प्रणालियों, हथियारों, गोला-बारूद और उन्नत प्रौद्योगिकियों की ताकत का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताएँ, निरंतर स्वदेशी नवाचार और विनिर्माण का परिणाम हैं।

सतीश रेड्डी ने ईरान-अमेरिका और इजराइल संघर्षों सहित बदलते भू-राजनीतिक संघर्षों के बीच आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी आधारित युद्ध और ड्रोन प्रणालियाँ राष्ट्रीय सुरक्षा में निर्णायक कारक बन गई हैं। भारत के रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्रों में महिलाओं की अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि कई प्रमुख रक्षा संस्थानों और उद्योगों की उपस्थिति के कारण हैदराबाद रक्षा एवं अंतरिक्ष उद्योगों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है।

2028 तक 50 हजार करोड़ रुपये रक्षा निर्यात का लक्ष्य

डॉ. सतीश रेड्री ने आगे कहा कि हाल के वर्षों में भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में आवश्यकता स्वीकृति ढाँचे के तहत लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये के रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। यह भारत के इतिहास में सैन्य आधुनिकीकरण के लिए दो गई सबसे बड़ी स्वीकृतियों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा निर्यात लगातार बढ़ रहा है। रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य 2028 तक 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है।

स्टार्टअप और लघु एवं मध्यम उद्यमों को इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि नवाचार आधारित उद्यमों के लिए वित्तीय सहायता अब कोई बड़ी चुनौती नहीं है। अवसर पर डॉ. चंद्रिका कौशिक ने कहा कि रक्षा विनिर्माण में परिचालन क्षमता और आत्मनिर्भरता के निर्माण के लिए समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि निसाइल, रडार, टॉरपीडो, हथियार, गोला-बारूद और उन्नत प्रणालियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में डीआरडीओ की परियोजनाओं में 2,000 से अधिक उद्योग विकास भागीदार के रूप में योगदान दे रहे हैं।

डीआरडीओ ने 2200 से अधिक लाइसेंसिंग समझौतों पर किए हस्ताक्षर

डीआरडीओ ने 2,200 से अधिक लाइसेंसिंग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से नब्बे प्रतिशत से अधिक में निजी उद्योग की भागीदारी है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए भारतीय उद्योग को डीआरडीओ के 750 से अधिक पेटेंट बिना किसी रॉयल्टी के और बिना किसी लागत के उपलब्ध कराए जा रहे हैं। रक्षा खरीद सुधारों के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया ने लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए विशेष मार्ग बनाए हैं, जिनमें मेक श्रेणी के तहत 100 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं का विशेष आवंटन और 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं में एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए टर्नओवर व नेट वर्ध मानदंडों में छूट शामिल है।

डॉ. चंद्रिका कौशिक ने कहा कि नीतिगत ढांचा, वित्त पोषण तंत्र और खरीद प्रणाली पूरी तरह से उद्योग की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए संरेखित है। एफटीसीसीआई के अध्यक्ष आर. रवि कुमार ने कहा कि यह आयोजन एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण में उभरते अवसरों से एमएसएमई को जोड़कर उन्हें सशक्त बनाने के प्रति एफटीसीसीआई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। तेलंगाना अपने मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र, प्रगतिशील नीतियों और कुशल प्रतिभाओं के साथ इस परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त स्थिति में है।

आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने की पहल

औद्योगिक विकास समिति के अध्यक्ष पी. कृष्णा ने कहा कि एमएसएमई स्पार्क 3.0 के माध्यम से एफटीसीसीआई का उद्देश्य खरीद अवसरों, वित्तीय सहायता और प्रौद्योगिकी साझेदारी के बारे में जागरूकता पैदा करके उद्योग, सरकार और उद्यमियों के बीच समन्वय स्थापित करना है, ताकि स्वदेशी विनिर्माण को गति और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को मजबूती मिल सके।

अवसर पर नीति आयोग के पूर्व सदस्य और डीआरडीओ के पूर्व महानिदेशक डॉ. वी. के. सारस्वत तथा पुणे स्थित रक्षा उन्नत प्रौद्योगिकी संस्थान के कुलपति डॉ. बी.एच.वी.एस. नारायण मूर्ति सहित अन्य ने भी विचार साझा किए। सम्मेलन में रक्षा खरीद के अवसरों, वित्तपोषण योजनाओं, निवेश के तरीकों और एयरोस्पेस एवं रक्षा विनिर्माण में उद्यमशीलता आदि विषयों से जुड़े सत्र आयोजित किए गए।

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