खुशी से कार्य करना आध्यात्मिक विकास की कुँजी : रमेशजी

हैदराबाद, साधारण तौर पर हम सब संसार में खुशी पाने के लिए कार्य करते हैं और जब हमारी इच्छा के अनुरूप हमें कार्य के परिणाम नहीं मिलते, तब हम दुःखी हो जाते हैं, जबकि हमें हर कार्य हमेशा खुशी के भाव से भर कर करना चाहिए न की खुशी पाने के लिए। जब हम खुश होकर कोई कार्य करते हैं, तब दुःख का कोई प्रश्न ही नहीं होता और हम दुःख-सुख के झंझट से पार आनंद में रहते हैं।

उक्त उद्गार सद्गुरु रमेशजी ने जूम पर आयोजित सत्संग में व्यक्त किए। देश-विदेश से जुड़े साधकों की शंकाओं का समाधान करते हुए रमेशजी ने कहा कि परेशानियाँ भी केवल मनुष्य को ही आती हैं, किसी अन्य योनि के जीव को नहीं। जब तक हम परेशानियों को परेशानी समझेंगे, तब तक हम परेशान होते रहेंगे।

इसके लिए सबसे अच्छा उपाय यह है कि हम परेशानियों में भी परमात्मा की कृपा को देखने का प्रयास करें और परेशानियों में आनंद ढूँढें, क्योंकि वास्तव में जीवन की कोई भी परेशानी हमारे उद्धार के लिए ही आती है, लेकिन अज्ञानतावश हम इसे कभी भगवान का प्रकोप और कभी किसी दूसरे का श्राप समझ लेते हैं। परेशानी के रूप में न केवल परमात्मा हमारे प्रारब्ध काटता है, बल्कि हमारी परीक्षा भी लेता है।

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हर परेशानी से बड़ा होता है भगवान

यदि हम परेशानी के समय भी शांत तथा धैर्यवान रहते हैं, तब हम प्रभु की परीक्षा में पास हो मुक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। यदि हम परेशानियों के समय हँसते हैं, खुश रहते हैं और मजे करते हैं, तभी भगवान की नजर हम पर पड़ती है और हमें भी भगवान के दर्शन होते हैं। भूल कर भी किसी परेशानी को बड़ा न समझें, क्योंकि हर परेशानी से बड़ा आपका भगवान है, जो जीवन को सार्थक बनाने के लिए केवल मार्ग बना रहा है।

रमेशजी ने कहा कि आध्यात्मिक मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ने के लिए हमें जीवन में स्वीकार्यता बढ़ानी है, अपेक्षा कम करनी है, तुलना नहीं करनी है। इससे मन शांत होता है और हमारी आत्मिक शक्ति बढ़ती है। रमेशजी ने कहा कि जैसे ही कोई नकारात्मक विचार मन में आता है, तुरंत मुस्कुराएँ, आपकी मुस्कुराहट से वह विचार खुद भाग जाएगा और अगर मन में कई सारे नकारात्मक विचार इकट्ठे हो गए हैं, तो उन सब का बंडल बनाकर ब्रह्मांड में छोड़ दें या खुले आकाश के नीचे जाकर आँखें बंद करके उन्हें आकाश में भेज दें।

गुरु माँ ने अपने संबोधन में कहा कि यदि आप कुछ नहीं कर सकते हैं, तो सबसे बेहतर है समर्पित हो जाएँ और आप जिसको समर्पित हैं, अपनी सारी समस्याएँ उसके चरणों में अर्पित कर दें, आप मुक्त हो जाएँगे।

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