संविधान संशोधन विधेयक का गिरना भाजपा की नीयत की हार : रेवंत रेड्डी

हैदराबाद, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने लोकसभा में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक (131वां संशोधन बिल, 2026) के गिरने को भाजपा की “नीयत की हार” करार दिया है। उन्होंने इसे भाजपा के लिए कोई सामान्य राजनीतिक झटका नहीं, बल्कि उनके “छिपे हुए एजेंडे” की हार बताया हैI
रेवंत रेड्डी द्वारा लगाए गए प्रमुख आरोप और प्रतिक्रिया के मुख्य बिंदु:
- नीयत पर सवाल: रेड्डी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महिलाओं को आरक्षण देने के आड़ में वास्तव में संसद में सीटों की संख्या बढ़ाकर संविधान को बदलने और दलितों/आदिवासियों के आरक्षण को खत्म करने की योजना बना रही थी।
- परिसीमन से लिंक पर आपत्ति: उन्होंने कहा कि अगर महिला आरक्षण ही एकमात्र उद्देश्य था, तो इसके लिए एक सरल संशोधन पर्याप्त था। इसे परिसीमन (Delimitation) से जोड़ना अनुचित था।
- इतिहास का ‘रेड-लेटर डे’: मुख्यमंत्री ने इस बिल के गिरने को भारतीय इतिहास में एक “ऐतिहासिक दिन” (Red-letter Day) बताया और इसे “राष्ट्रीय आपदा” टलने जैसा करार दिया।
- विपक्ष की एकजुटता: उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्षी दलों (INDIA गठबंधन) की एकजुटता की सराहना की, जिसने इस विधेयक को बहुमत (352) से पहले 230 वोटों के साथ हरा दिया।
- चुनौती: रेड्डी ने केंद्र सरकार को चुनौती दी कि यदि उनकी नीयत साफ है, तो वे परिसीमन के बिना केवल महिला आरक्षण का नया बिल लाएं, जिसे पूरा विपक्ष समर्थन देगा।
- उत्तर-दक्षिण विभाजन का आरोप: उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस विधेयक के माध्यम से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रही थी
यह घटना अप्रैल 2026 में परिसीमन से जुड़े महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष के कड़े विरोध के बाद सामने आई है, जिसमें लोकसभा में 298 वोट पक्ष में और 230 वोट विपक्ष में पड़े, जिससे यह दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा।(PTI)
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