खाली सरकारी जमीनों पर पार्क की मांग, हैद्रा प्रजावाणी में 46 शिकायतें

हैदराबाद, हैद्रा द्वारा सरकारी जमीनों से कब्जा हटाने, कब्जों को विकसित करने से उत्साहित होकर कई लोग खाली सरकारी जमीनों पर पार्क विकसित करने की मांग करते हुए हैद्रा से संपर्क कर रहे है। आज हैद्रा के प्रजावाणी कार्यक्रम में लगभग 46 शिकायतें प्राप्त हुई, जिनमें से ज्यादातर शिकायतें पार्को को विकसित करने से संंबंधित थी। 

नागरिकों ने हैद्रा से अपील की कि झीलों के साथ-साथ ले-आउट और आवासीय क्षेत्रों में सार्वजनिक उपयोग के लिए छोड़ी गई खाली जमीनों को पार्कों के रूप में विकसित किया जाए, ताकि शहर को हरियाली और शुद्ध हवा मिल सके। कई लोगों ने आवासीय कॉलोनियों के बीच स्थित छोटी-छोटी सरकारी जमीनों को घेराबंदी कर पार्कों में बदलने की मांग की। निजामपेट स्थित तुर्का चेरुवु के अंतर्गत आने वाली सरकारी भूमि को सुरक्षित कर पार्क के रूप में विकसित करने का भी अनुरोध किया गया। 

डंपिंग यार्ड, भूजल प्रदूषण और मुआवजे को लेकर हैद्रा में उठीं शिकायतें

सभी शिकायतों की समीक्षा हैद्रा आयुक्त ए.वी. रंगनाथ ने की और संबंधित अधिकारियों को समाधान की जिम्मेदारी सौंपी।हैद्रा को मेडचल के कंडलाकोया गांव में कोर्ट भवन, ट्रैफिक पुलिस स्टेशन और सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के लिए आरक्षित सरकारी जमीन को डंपिंग यार्ड में बदलने की शिकायत मिली। गुंड्लापोचमपल्ली नगर पालिका द्वारा संबंधित क्षेत्र में कचरा डालकर जलाने का विरोध करते हुए आसपास की कॉलोनियों और अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों ने शिकायत की। 

स्थानीय लोगों ने भूजल प्रदूषण की आशंका जताते हुए सरकारी जमीन को बचाने की मांग की। रामंतापुर बड़े चेरुवु में प्लॉट डूबने का मुद्दा उठाते हुए स्थानीय निवासियों ने भूमि के बदले भूमि या उचित मुआवजे की मांग की। उन्होंने बताया कि 1958 के ग्राम पंचायत ले-आउट में खरीदे गए उनके प्लॉट जलमग्न हो गए, जबकि उसी ले-आउट में कुछ लोग मकान बनाकर रह रहे हैं। झील विकास के नाम पर मुआवजा देने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ।

सरकारी जमीन और नालों पर कब्जों की शिकायत

रंगारेड्डी जिले के बालापुर स्थित जन्नारम कॉलोनी में राजीव गृहकल्पा योजना के तहत बने अपार्टमेंट्स के सामने और पीछे पार्किंग के लिए छोड़ी गई जमीनों पर अवैध कब्जे कर दुकानों और अतिरिक्त कमरों का निर्माण हटाने की भी शिकायत मिली। उसी तरह, निजामपेट के बाचुपल्ली में तुर्का चेरुवु और उसके बंध पर कब्जों की शिकायत सामने आई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां सरकारी जमीन को अपनी परियोजनाओं में शामिल कर प्रहरी दीवार बना रही हैं। उन्होंने 10 गुंटा सरकारी भूमि को सार्वजनिक उपयोग में लेकर छोटे पार्क विकसित करने की मांग की।

इसके अलावा, अमीनपुर के कोम्मु चेरुवु तक जाने वाली बाढ़ नाला पर कब्जों का मुद्दा उठाया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि रियल एस्टेट कंपनियां नाले पर निर्माण कर रही हैं, जिससे जलभराव की समस्या बढ़ रही है। इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में केस चलने के बावजूद अनुमति दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए और नाले से कब्जे हटाने की मांग की गई। आयुक्त ने सभी शिकायतों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिए।

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