प्रत्यक्ष अनुभव ही है धर्म : आस्था भारतीजी
हैदराबाद, तर्क-वितर्क तथा अन्य कोई वस्तु नहीं, प्रत्यक्ष अनुभव ही धर्म है। यही हमारे विश्वास को पर्वत के समान दृढ़ बना सकता है। उक्त उद्गार अत्तापुर स्थित श्री चिन्ना अनंतगिरि शिवालयम, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित श्री कृष्ण कथा के चतुर्थ दिवस कथा का रसपान करवाते हुए कथा व्यास साध्वी आस्था भारतीजी ने व्यक्त किए। आस्था भारतीजी ने कहा कि मीराबाई केवल कृष्ण को मानने तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने कृष्ण को जाना भी।
मंदिर की मूरत से भगवान की सूरत तक की यात्रा कर उन्होंने अपनी भक्तियात्रा को पूर्ण किया। ईश्वर कोई कल्पना नहीं, वह तो विशुद्ध विज्ञान है। ईश्वर का विज्ञान, विज्ञानों का विज्ञान है। एक वैज्ञानिक पहले प्रयोग करता है, फिर उसे सैद्धांतिक रूप देता है। भविष्य में विज्ञान के विद्यार्थी उस सिद्धांत को पढ़कर प्रयोगशाला में उसका प्रयोगात्मक परीक्षण करते हैं। हमारे परम वैज्ञानिक ऋषियों ने इसी सत्य को शास्त्र-ग्रंथों में उद्घाटित किया।
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धर्म के नकद अनुभव और पंढरपुर दही-हांडी आयोजन
हमारे दादा-परदादा, माता-पिता और फिर हम, इन्हीं ब्रह्मनिष्ठ पूर्वजों के उत्तराधिकारी हैं। परन्तु हम उनसे मिले ईश्वर दर्शन की अनमोल धरोहर को सहेज नहीं पाए। स्वामी रामतीर्थ कहते हैं कि धर्म के दो प्रकार हैं उधार और नकद। उधार धर्म सैद्धांतिक, मत-मान्यताओं तक ही सीमित है। इसमें पूर्वजों की सोच को बिना जाने-परखे बस अपना लिया जाता है। परन्तु नकद धर्म ईश्वर का प्रत्यक्ष साक्षात्कार है, स्वयं का अनुभव है।
संस्थान के चेन्नई आश्रम से पधारे आशुतोष महाराजजी के शिष्य स्वामी प्रदीपानंदजी ने बताया कि गुरुवार, 18 सितंबर को भक्त नामदेवजी का नाम संकीर्तन व पंढरपुर में दही-हांडी उत्सव का प्रसंग साध्वीजी प्रस्तुत करेंगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में भाग लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में साध्वी भावना भारतीजी, साध्वी साक्षी भारतीजी, मुख्य यजमान बगदाराम कुमावत, दैनिक यजमान सुदेश गोगिकर, दर्शन कुमार पन्तुल, उत्सव यजमान संध्या जोड़वे, मुख्य अतिथि कैलाश नारायण भांगड़िया, राजगोपाल करवा, गोविंद जाजू, नारायणदास झँवर, गोविंद राम झँवर, कृष्ण कुमार संघी, सुनील तोतला, मीठालाल प्रजापत, रजनीश सारड़ा, ज्योति शर्मा, शकुंतला नावंदर, मंजू लाहोटी, लीला बजाज, मराठा समाज (रामबाग, अत्तापुर) के मदन जाधव, सुरेश कुमार सूर्यवंशी, मारुति राव गायकवाड़, मनोहर राव सूर्यवंशी, भास्कर राव काकरे, सुभाष माणे, सोपान जाधव, बाबूराव, दशरथ कदम, एकनाथ पाटिल, विनायक राव बोबड़े एवं अन्य उपस्थित थे।
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