पारंपरिक मानकों से सफलता को न मापें- बोमन ईरानी

हैदराबाद, यंग फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन हैदराबाद चैप्टर द्वारा आज `नॉलेज- दि कंपास फॉर लाइफ’ विषयक एक प्रेरक सत्र का आयोजन किया गया। बेगमपेट स्थित होटल आईटीसी काकतिया में आयोजित इस कार्यक्रम में जाने-माने अभिनेता बोमन ईरानी ने अपने जीवन के व्यक्तिगत किस्से साझा किए तथा अपनी विनम्रता और हास्य से सदस्याओं को मंत्रमुग्ध किया।

बोमन ईरानी ने विषय पर अपने विचार साझा करते हुए कहा व्यक्तित्व को अपनाने और पारंपरिक मानकों से सफलता को न मापने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा जीवन में कुछ भी छोटा या बड़ा नहीं होता। यह सब हमारे दिमाग में होता है। उन्होंने कहा कि वे 7वीं कक्षा तक एक शर्मीले तथा डिस्लेक्सिक बच्चे थे। 10वीं तक उन्होंने बोलने में दिक्कत और तुतलाहट की समस्या का सामना भी किया। मुझे मंच, लाइमलाइट और अपनी आवाज को बुलंद करना पसंद था। उन्होंने याद किया कि कैसे उनकी माँ के दृढ़ संकल्प और समर्थन से डिस्लेक्सिया और अपनी बोलने की समस्याओं पर काबू पाया। उन्होंने अपनी बोली सुधारने के लिए गायन का इस्तेमाल किया और यहाँ तक कि अपने मुँह में कंकड़ रखकर भी अभ्यास किया। उन्होेंने कहा कि मैंने 41 साल की उम्र में फिल्मों में शुरुआत की। आज मेरे पास शब्दों की कमी नहीं है। आज मेरे पास जो भी ज्ञान है, वह मैंने फिल्मों में काम करके हासिल किया है।

‘सफलता’ को लेकर बोमन ईरानी का नया नजरिया
बोमन ईरानी ने कहा कोई भी व्यक्ति परिपूर्ण नहीं होता। हर कोई शकुंतला देवी की तरह गणितीय प्रतिभा नहीं रखता, लता मंगेशकर की तरह नहीं गाता या विराट कोहली की तरह क्रिकेट नहीं खेलता। हर व्यक्ति अद्वितीय होता है, और माताओं को विशेष रूप से अपने बच्चे की विशिष्टता को पहचानना और प्रोत्साहित करना चाहिए। शारीरिक चुनौतियों या सीमाओं को कभी भी किसी को अपने जुनून का पीछा करने से नहीं रोकना चाहिए। मुन्ना भाई एमबीबीएस तथा 3 इडियट्स आदि जैसी फिल्मों अविस्मरणीय भूमिकाओं पर उन्होंने कहा मैं अपनी हर भूमिका में 100 प्रतिशत देने का प्रयास करता हूं। साथ ही सतत रूप से अपनी रचनात्मक सीमाओं को आगे बढ़ाता हूँ और विकास के लिए प्रतिबद्ध रहता हूं। यह प्रतिबद्धता मेरी यात्रा की कुंजी रही है।

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वाईएफएलओ हैदराबाद की अध्यक्ष पल्लवी जैन ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा प्रसिद्ध अभिनेता बोमन ईरानी को निरंतर सीखने और प्रभावशाली संचार का एक सच्चा अवतार बताया। अवसर पर उल्लेखनीय संख्या में सदस्याओं ने उपस्थित होकर सत्र का लाभ लिया।

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