खरमास का अंत और शुभ कार्यों का श्रीगणेश

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य को करने के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। पंचांग के अनुसार हिन्दू नववर्ष का दूसरा माह वैशाख मास के रूप में जाना जाता है। इस पूरे महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ेंगे, जो धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माने जाते हैं। इसी दौरान खरमास समाप्त होगा, जिसे शुभ कार्यों में बाधक माना जाता है। इस माह में भगवान सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे।

इस परिवर्तन के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा। इसके बाद विवाह, गफह-प्रवेश, मुंडन तथा अन्य सभी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय की शुरुआत मानी जाएगी, जिससे लोगों में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिलेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, खरमास के समय सूर्यदेव धनु या मीन राशि में स्थित होते हैं।

इस कालखंड में सूर्य की तेजस्वी ऊर्जा कुछ मंद मानी जाती है, चूंकि सूर्य को नवग्रहों का अधिपति और आत्मबल का प्रमुख कारक माना गया है, इसलिए उनकी पूर्ण कृपा के अभाव में किए गए मांगलिक कार्य अपेक्षित सफलता प्रदान नहीं कर पाते हैं। इस अवधि में देवगुरु बफहस्पति भी अपनी संपूर्ण शुभ शक्ति का प्रभाव नहीं दिखा पाते हैं, जिसके कारण शुभ आयोजनों का फल अधूरा या कमजोर रह सकता है। 14 अप्रैल, मंगलवार को सूर्यदेव के मेष राशि में प्रवेश करते ही खरमास समाप्त हो जाएगा और 15 अप्रैल, बुधवार से विवाह, मुंडन और गफह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक एवं शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे और शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे।

शुभ मुहूर्त

इस वर्ष अप्रैल में विवाह के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, जो नए जीवन की शुरुआत के लिए बेहद मंगलकारी माने जा रहे हैं। इस महीने की शुरुआत के बाद 15 अप्रैल बुधवार, 20 अप्रैल सोमवार, 21 अप्रैल मंगलवार, 25 अप्रैल शनिवार, 26 अप्रैल रविवार, 27 अप्रैल सोमवार, 28 अप्रैल मंगलवार और 29 अप्रैल बुधवार को भी विवाह के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा।

कुल मिलाकर इस वर्ष अप्रैल का महीना मांगलिक कार्यों के लिए काफी अच्छा माना जा रहा है, जिसमें कई उत्तम तिथियां उपलब्ध हैं। भारत के विभिन्न हिस्सों में मेष पांति को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। बैसाखी (पंजाब), पोइला बोइशाख (पश्चिम बंगाल), पुथंडु (तमिलनाडु) और बोहाग बिहू (असम) जैसे त्योहार इसी दिन या इसके आस-पास मनाए जाते हैं।

दान परंपरा

मेष पांति की सुबह स्नान करके सूर्यदेव को जल अर्पित करें। मान्यता है कि सत्तू, गुड़, जल, पंखा, वस्त्र और फल का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर सकारात्मकता अपनाने की सलाह दी जाती है।

धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मेष पांति के दिन सूर्यदेव की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन में ऊर्जा, सफलता और सकारात्मकता का संचार होता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण के प्रभाव को और अधिक मजबूत करता है, जिससे दिन बड़े और मौसम गर्म होने लगता है।

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यही कारण है कि इसे नई शुरुआत, उन्नति और शुभ कार्यों के आरंभ का समय माना जाता है। पुराणों में वर्णित है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। खासकर गंगा-स्नान और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा बेहद शुभ मानी जाती है।

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