माँ की ममता को समर्पित पर्व
यशोदा जयंती
तिथि मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि आज रात 1 बजकर 18 मिनट से शुरु हो रही है, जो 8 फरवरी, रविवार की रात 2 बजकर 54 मिनट पर समाप्त हो रही है। उदया तिथि के आधार पर यशोदा जयंती आज मनाई जाएगी।
सनातन धर्म में जब भी माँ और बेटे के निस्वार्थ प्रेम की बात की जाती है, तो माँ यशोदा और श्री कृष्ण का नाम सबसे पहले याद किया जाता है। बिना माता यशोदा के भगवान श्री कृष्ण की कथा कभी पूरी नहीं होती है। पौराणिक परंपरा के अनुसार, हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्टि तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। ये पावन पर्व माँ की ममता को समर्पित किया गया है, जो माता यशोदा के जन्मदिवस पर मनाया जाता है।
भले ही श्री कृष्ण का जन्म मां देवकी के गर्भ से हुआ, लेकिन संसार उनको यशोदा के लाल के रूप में ही जानता है। माता यशोदा ने ही नन्हे से श्री कृष्ण का स्नेह, ममता और प्रेम से पालन-पोषण किया था। यशोदा जयंती को विधि-विधान से माता यशोदा और भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती का व्रत रखने से विवाहित स्त्रियों की सूनी गोद भर जाती है।
पूजा विधि
यशोदा जयंती पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनकर माता यशोदा के निमित्त व्रत का संकल्प लें। पूजाघर में चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर माता यशोदा के साथ बाल श्री कृष्ण की मूर्ति रखें। पूजा के दौरान दीपक व अगरबत्ती प्रज्जवलित करें। पुष्प, तुलसी दल, चंदन, हल्दी, कुमकुम और नारियल चढ़ाएं।
माता यशोदा को लाल चुनरी चढ़ाएं। भगवान श्री कृष्णऔर माता यशोदा को माखन व मिश्री का भोग लगाएं। फल, दही, खीर और मिठाइयां चढ़ाएं। ॐ कृष्णय नम मंत्र का जाप करें। माता यशोदा- कृष्ण की वात्सल्य कथा का पाठ करें। पूजा का समापन आरती के साथ करें। दिनभर व्रत रखें। सायं काल पूजा के बाद फलाहार करें। जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र का दान दें।
महत्व
यशोदा जयंती का व्रत रखने महिलाओं को श्री कृष्ण जैसी गुणी संतान मिलती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती को विधि-विधान से पूजन और व्रत करने से संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं। संतान के जीवन में सुख-सौभाग्य भी बढ़ता है।
संदर्भ
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, यशोदा गोलोक (भगवान का परम धाम) की मुख्य गोपियों में से एक थीं, जो पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इन ग्रंथों में वर्णन है कि यशोदा ने ही राधा और श्रीकृष्ण के मिलन के प्रारंभिक क्षणों में अपनी ममतामयी छाया प्रदान की थी। श्रीमद्भागवत पुराणादि ग्रंथों में बाल-लीलाएं, माखन चोरी और वात्सल्य रस की प्रधानता है।
विष्णु पुराण में श्रीकृष्ण को कंस से बचाने के लिए यशोदा के घर छोड़ने की नीति का वर्णन है। हरिवंश पुराण में गोकुल की संस्कृति और यशोदा-नंद के सामाजिक जीवन का वर्णन है। पद्म पुराण में यशोदा के पूर्व जन्म (धरा) और ब्रह्मा के वरदान का विवरण अंकित है। देवकी और यशोदा की अत्यंत सुंदर तुलना पौराणिक ग्रंथों में करते हुए कहा गया है- देवकी भगवान के ऐश्वर्य (शक्ति) की माता हैं, क्योंकि कृष्ण ने उनके सामने चतुर्भुज रूप में दर्शन दिए, लेकिन यशोदा भगवान के माधुर्य (मिठास) की माता हैं, क्योंकि श्रीकृष्ण उनके सामने केवल एक असहाय बालक बनकर रहे।
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