व्रत से जुड़े साधारण नियम
हिन्दू धर्म में व्रत व उपवास दैहिक और आध्यात्मिक लाभ पाने का श्रेष्ठ साधन है। इससे जुड़े सरल नियम हैं, जो न केवल आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम हैं, बल्कि स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और इच्छित फल की प्राप्ति में भी सहायक सिद्ध होते हैं। ऐसे में यहाँ विस्तार से जानते हैं कि व्रती को व्रत के दौरान किन नियमों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। व्रत-उपवास से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण बातें हैं, जिन्हें हर व्यक्ति को जानना चाहिए। ये सभी छोटे-छोटे लाभदायक सूत्र व्रत-त्योहारों के लिए मार्गदर्शक का कार्य कर व्रती के मनोरथों को पूर्ण करते हैं।
व्रत धारण करते समय तन और मन दोनों की शुद्धता आवश्यक है। इसलिए व्रत में सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए तथा वस्त्र भी साफ-सुथरे व स्वच्छ होने चाहिए। व्रत की पूजा स्वच्छ और मनोरम स्थल पर करनी चाहिए। व्रत पारण के दौरान संकल्प पर विशेष जोर दिया जाता है। व्रत रखने के लिए चौबीस घंटे पूर्व आहार-विहार और चित्त की एकाग्रता पर पूरा ध्यान रखना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि व्रत आरंभ करने के बाद यदि क्रोध, लोभ, मोह या आलस्यवश व्रत को अधूरा छोड़ा गया है तो तीन दिन तक अन्न का त्याग करके व्रत को पुनः प्रारंभ कर देना चाहिए।
यदि आपने संकल्प लिया है तो यथासाध्य उसका पालन करना चाहिए। व्रत की अवधि पूरी होने पर उसका उद्यापन करना चाहिए। इसके बिना व्रत को निष्फल माना जाता है। प्रायः लोग व्रत व उपवास के एक दिन पूर्व अधिक से अधिक भोजन ग्रहण कर लेते हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। धर्मशास्त्रों में इस तरह की परिपाटी की निंदा की गई है। व्रत के दिन सिर या शरीर पर तेल या उबटन का उपयोग करना वर्जित है।
व्रत पालन में जरूरी सावधानियां
व्रत के पूर्व और पारण के समय तली चीजें ग्रहण नहीं करनी चाहिए। इस अवधि में नाखून काटना वर्जित है। व्रत की अवधि में चोरी, झूठ बोलना, धोखा देना, बेईमानी करना आदि पाप-कर्मों को त्याग कर क्षमा, दया, दान, देव-पूजा, पवित्र एवं पुण्यदायक कार्य करने चाहिए। संकल्प के पश्चात स्त्रियां यदि रजस्वला हो जाएं तो भी उन्हें व्रत का पालन करना चाहिए। इससे व्रत में कोई रुकावट नहीं होती है। व्रत या श्राद्ध में दातुन नहीं करना चाहिए।
यह भी पढ़े: सन् 2026 में महिलाओं के मुख्य व्रत
यदि दातुन करना आवश्यक हो तो केवल जल के बारह कुल्ले कर इतिश्री कर लें। व्रत प्रारंभ करने के पश्चात किसी भी प्रकार से खंडित होए तो गौदान आदि करके व्रत पुनः आरंभ किया जा सकता है। हवन के समय देवताओं को गाय के दूध से निर्मित शुद्ध घी से ही आहुतियां दी जानी चाहिए। अपने परिश्रम द्वारा अर्जित धन का ही इस दौरान उपयोग करना चाहिए।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



