रमजान मास के पहले दिन से शुरु होंगे रोजे

इस्लाम धर्म में रमजान का महीना सबसे पवित्र, बरकत और इबादत से भरा माना जाता है। यह वह समय होता है, जब मुसलमान अल्लाह की इबादत में खुद को पूरी तरह समर्पित कर देते हैं, अपने गुनाहों से तौबा करते हैं और नेक रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं। शाबान का महीना खत्म होते ही पूरी दुनिया के मुसलमानों को रमजान के चाँद का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी सन) पूरी तरह से चंद्रमा की चाल पर आधारित होता है।

रमजान की शुरुआत चांद दिखने पर ही तय होती है, लेकिन खगोलीय गणनाओं के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है। इस वर्ष सऊदी अरब और खाड़ी देशों में 18 फरवरी को रमजान का चांद नजर आ सकता है, जिससे पहला रोजा उसी दिन या अगले दिन रखा जा सकता है। अगर 18 फरवरी की शाम र्वे भारत में रमजान का चांद नजर आता है, तो 19 फरवरी, गुरुवार को पहला रोजा रखा जा सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय स्थानीय चांद देखने वाली कमेटियों द्वारा ही लिया जाएगा।

रमजान को इस्लाम में नेकियों का मौसम कहा जाता है। इस महीने की सबसे बड़ी धार्मिक मान्यता यह है कि सन् 610 ईस्वी में इसी महीने की एक पवित्र रात लैलातुल कद्र को अल्लाह ने फरिश्ते जिब्रील के जरिए पैगंबर मोहम्मद पर कुरान शरीफ की पहली आयतें नाजिल की थीं। रमजान में एक नेकी का सवाब 70 गुना तक बढ़ जाता है। जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। रोज़ा सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है।

रमजान में जकात और सदका का महत्व

इस्लाम में रोज़ा केवल सुबह से शाम तक खाने-पीने से परहेज करना नहीं है, बल्कि यह रूहानी पाकगी (आत्मिक शुद्धता) का माध्यम माना जाता है। रोज़ा रखने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वह झूठ और बुरी बातों से बचें। किसी की चुगली या बुराई न करें। गलत न देखें और न सुनें। अपने विचारों को भी पाक रखें। रमजान के दौरान जकात और सदका देने को बहुत बड़ा सवाब माना गया है। हर सक्षम मुसलमान अपनी सालाना आय का एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को देता है।

जकातः साल में एक बार फर्ज फितराः ईद की नमाज से पहले देना अनिवार्य। इसका मकसद यह है कि समाज का हर वर्ग ईद की खुशियों में शामिल हो सके। रमजान का महीना 29 या 30 दिनों का होता है। इसके समाप्त होते ही शव्वाल महीने की पहली तारीख को ईद-उल-फितर मनाई जाती है, जो इस वर्ष अंग्रेजी कैलंडर के आधार पर 21 मार्च, शनिवार को हो सकती है। ईद के दिन मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज अता की जाती है। एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं। घरों में सेवइयां और पकवान बनाए जाते हैं।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button