इंडस्ट्रियल लैंड कनवर्शनों की जानकारी शीघ्र सार्वजनिक करेगी सरकार : भट्टी विक्रमार्का
हैदराबाद, उप-मुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्का ने कहा कि बीआरएस नेताओं ने अपने चाहने वाले लोगों के लिए औद्योगिक भूमि उपयोगिता परिवर्तन किया। कोई नीति नहीं थी, मंत्रिमंडल की अनुमति नहीं थी। औद्योगिक पार्कों में अपने वालों के लिए भूमि कन्वर्ट की गयी। बीआरएस नेताओं द्वारा कितने उद्योग जमीनों की उपयोगिता परिवर्तन की गयी और किनके लिए ऐसा किया गया, इसकी जानकारी जल्द ही जनता के सामने रखी जाएगी।
भट्टी विक्रमार्का ने सचिवालय में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, श्रीधर बाबू, जूपल्ली कृष्ण राव आदि के साथ संवाददाताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार पिछली सरकार की तरह मनमर्ज़ी से औद्योगिक भूमियों की उपयोगिता का परिवर्तन नहीं कर रही है। हमारी सरकार ने पारदर्शिता के साथ हैदराबाद में औद्योगिक भूमि उपयोगिता परिवर्तन नीति लायी। यह नीति हैदराबाद को प्रदूषण से बचाने और राज्य का राजस्व बढ़ाने के लक्ष्य से लायी गयी।
हमने यह नीति तैयार करने से पहले इस पर गहराई से चर्चा की। मंत्रिमंडल की बैठक में भी लंबी चर्चा करने के बाद नीति लायी गयी। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर गरीब परिवारों के लिए कल्याण योजनाएँ लागू की जा रही हैं। प्रतिवर्ष इसका खर्च बढ़ता जा रहा है। जनता पर अतिरिक्त कर बोझ डालने का कोई इरादा नहीं है। इसके चलते सरकार पर अतिरिक्त आय के स्रोतों को तलाशने की आवश्यकता है।
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हैदराबाद उद्योगपतियों को ओआरआर के बाहर स्थानांतरण का मौका
भट्टी विक्रमार्का ने कहा कि औद्योगिक भूमि उपयोगिता परिवर्तन नीति के तहत हैदराबाद शहर में स्थित सभी उद्योगपतियों को ओआरआर के बाहर अपने उद्योगों का स्थानांतरण करने का मौका दिया गया है। इस नीति के तहत भूमि की उपयोगिता को बदलने हेतु आगे आने वाली भूमि पर अगर 80 फुट चौड़ाई की सड़क है, तो 50 प्रतिशत शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा। यदि 80 फुट से कम चौड़ाई की सड़क है, तो 30 प्रतिशत शुल्क का भुगतान करना होगा। इससे सरकार को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।
भट्टी विक्रमार्का ने कहा कि नाचारम, चेर्लापल्ली, मौलाली, उप्पल, जीडिमेट्ला, बालानगर, कुकटपल्ली जैसे औद्योगिक पार्क 50 साल पहले हैदराबाद से बाहर थें। उस समय की सरकारों ने उद्योग क्षेत्र के विकास के लिए औद्योगिक पार्क बनाने को बढ़ावा दिया था। पिछले 50 सालों में हैदराबाद शहर का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है और औद्योगिक पार्कों के आस-पास बड़े पैमाने पर आवासों का निर्माण। अब हैदराबाद शहर को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए उन उद्योगों को आउटर रिंग रोड से बाहर ले जाने का निर्णय किया गया है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण बढ़ जाने से स्कूल और सरकारी कार्यालयों को अवकाश देना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति हैदराबाद में आने से रोकने के लिए सरकार काम कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि न्यायालय ने शहर को औद्योगिक प्रदूषण से बचाने का सुझाव दिया। ऐसी स्थिति में उद्योगों को जबरन शहर से बाहर नहीं भेजा जा सकता। हमारी सरकार इसके लिए एक नीति लायी है। लेकिन बीआरएस नेता इस मुद्दे पर झूठा प्रचार करते हुए जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। एक सवाल के जवाब में मंत्री श्रीधर बाबू ने कहा कि बीआरएस सरकार के शासनकाल में किये गये औद्योगिक भूमि उपयोगिता परिवर्तनों की जाँच करवायेंगे।
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