सुधार की राह पर HCA, लीग के लिए नियुक्त किए गए मैच रेफरी

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हैदराबाद, तानाशाही रवैया, मनमर्जी और भ्रष्टाचारी क्रियाकलापों को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाला हैदराबाद क्रिकेट संघ (एचसीए), लगता है सुधार की राह पर चल पड़ा है। एचसीए में इसके पूर्व व्याप्त अनियमितताओं के कारण उसे अदालती कार्रवाई से भी गुजरना पड़ा। कई बार अदालत के अलावा सरकार ने भी एचसीए को फटकार लगाई। वर्तमान समय में एचसीए में कुछ बदलाव देखने को मिल रहा है। देर आए दुरुस्त आएँ की भाँति एचसीए अब सुधार के रास्ते पर निकल पड़ा है। एचसीए ने निर्णय लिया है, जो अब तक किसी राज्य के क्रिकेट संघ ने नहीं लिया।

गौरतलब है कि लीग मैचों के जरिए ही खिलाड़ियों का रणजी ट्रॉफी, अंडर-19 के अलावा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट मैचों के लिए चयन किया जाता है। इस मामले में वर्तमान समय तक एचसीए से अनुबंधित क्लब और लीग मैचों के अम्पायरों का ही दबदबा रहा। इन लोगों ने जो निर्णय ले लिया, वह सर्वमान्य था। लीग मैच के दौरान अम्पायर और क्लब के प्रतिनिधियों के बीच साँठ-गाँठ के चलते बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतने के आरोपों का खुलासा होने पर एचसीए ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लीग मैचों के लिए मैच रेफरी को नियुक्त किया है।

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लीग मैचों में भ्रष्टाचार रोकने की एचसीए की पहल

इसके पूर्व लीग मैच अम्पायरों के दिशा-निर्देश पर ही संचालित किए जाते थे और इन मैचों में अम्पायर गलती भी करते थे, तब उनकी गलती को भी नजरअंदाज किया जाता था। आगामी 19 जून से प्रारम्भ हो ने लीग मैचों का ध्याम में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। लीग मैचों को लेकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचारी क्रियाकलापों के आरोप लगाए गए। आरोप लगाने वालों ने यहाँ तक भी कहा कि लीग मैच में किन खिलाड़ियों को उभारना है, उसके लिए मौद्रिक रूप से लेन-देन भी किया जाता था।

सूत्रों ने बताया कि क्लब के संचालक और अम्पायर तथा खिलाड़ी के बीच आपसी साँठगाँठ से ही लीग मैच में अनियमितता बरती जा रही थी। चयनित खिलाड़ियों को ही जान-बूझकर अधिक रन बनाने और चयनित गेंदबाज को अधिक विकेट लेने का अवसर दिया जा रहा था। इन सभी तथ्यों और आरोपों को ध्यान में रखते हुए एचसीए ने देशभर में पहली बार लीग मैचों के लिए मैच रेफरी को नियुक्त करते हुए एक नई पहल प्रारंभ की है, जो निसंदेह अन्य राज्यों के क्रिकेट संघों के लिए आदर्श साबित होगी।

एचसीए के सचिव देवराज, संयुक्त सचिव और लीग मैच के प्रभारी बसवराज ने बताया कि इस प्रकार की अनैतिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य हो गया था, क्योंकि बड़े पैमाने पर लीग मैचों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए जा रहे थे। खिलाड़ियों की ओर से भी कई शिकायतें मिल रही थी। उन्होंने कहा कि यह तो शुरुआत मात्र है, आगे और महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएँगे, जिसके तहत भ्रष्टाचारी क्रियाकलापों को रोकने के लिए बीसीसीआई के तर्ज पर एंटी करप्शन यूनिट का भी निकट भविष्य में गठन किया जाएगा। यह यूनिट खिलाड़ियों, क्लब संचालकों, अम्पायरों, चयनकर्ताओं और एचसीए के प्रतिनिधियों पर कड़ी नजर रखेगी।

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