तेलंगाना आंदोलनकारियों को पेंशन और आवास स्थल पर सुनवाई स्थगित
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने चुनाव आश्वासन के तहत तेलंगाना आंदोलन में भाग लेने वाले आंदोलनकारियों को पेंशन और आवास स्थल उपलब्ध करवाने को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या चुनाव आश्वासन पर अभी उन्हें भरोसा है? अदालत ने यह भी कहा कि पेंशन और आवास स्थल से संबंधित आश्वासन को लेकर आदेश जारी करना मधुमक्खी के छत्ते को छेड़ने जैसा होगा।
अदालत ने कहा कि देश में रहते हुए तेलंगाना के लिए आंदोलन करने पर आंदोलनकारियों को स्वाधीनता सेनानी जैसे फायदे कैसे दिए जा सकते हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि तेलंगाना आंदोलन में बहुत से लोगों ने हिस्सा लिया था और क्या ऐसे सभी लोगों को 250 गज जमीन देना मुमकिन है। सरकार कितने लोगों को आवास स्थल दे पाएगी। अदालत ने आंदोलनकारियों को भू-प्लॉट और पेंशन देने के मुद्दे पर सरकार की राय जानने के लिए सुनवाई 23 फरवरी तक स्थगित कर दी।
गोल्लापल्ली नागराजू और के. यादगिरी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस ने सत्ता में आने पर तेलंगाना आंदोलन में भाग लेने वाले आंदोलनकारियों को पेंशन और आवास स्थल उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया था। इस संदर्भ में आवेदन प्राप्त करने के बाद भी इसका कोई परिणाम सामने नहीं आया। इस याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी ने सुनवाई की।
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आपराधिक मामलों के कारण आंदोलनकारियों को नौकरी नहीं मिली
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता करुणाकर रेड्डी ने दलील देते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने तेलंगाना आंदोलन में हिस्सा लेकर बहुत कुछ झेला है और आपराधिक मामलों की वजह से उन्हें नौकरी भी नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने पृथक तेलंगाना आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए अपनी जान भी जोखिम में डाली थी। उन्होंने कहा कि पृथक तेलंगाना आंदोलन को लेकर मामले दर्ज होने के कारण वे नौकरी पाने की योग्यता भी खो चुके हैं और बेरोजगार हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने पर 250 वर्ग गज आवास प्लॉट और पेंशन देने का आश्वासन पूरा नहीं किया गया।
इस पर हस्तक्षेप कर न्यायाधीश ने कहा कि पिछले 11 वर्ष से याचिका क्यों दायर नहीं की गई। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या वे चुनावी वादों पर भरोसा कर सकते हैं और चुनावी वादों के आधार पर याचिका कैसे दायर की जा सकती है। सरकारी आदेश के बिना याचिका दायर करना सही नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार ने तेलंगाना के आंदोलनकारियों के लिए कोई दिशा-निर्देश बनाए हैं या कोई सरकारी आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि अगर तेलंगाना आंदोलन में लाखों आंदोलनकारियों ने हिस्सा लिया था, तो क्या यह मुमकिन है कि अगर वे सभी आग्रह करें, तो उन्हें भू प्लॉट दिया जा सकता है।
मान लिया जाए कि टैंकबंड के पास आंदोलन में हजारों लोग मारे गए, क्या इनके परिवारों को भी 250 वर्ग गज भू-प्लॉट आवंटित करना मुमकिन है? इस पर अधिवक्ता ने कहा कि एक पत्रकार यादगिरी को भू-प्लॉट दिया गया है। उन्होंने कहा कि अन्य आंदोलनकारियों को फायदा देने के लिए जारी सरकारी आदेश उपलब्ध नहीं है। इस मामले पर सरकार की राय जानने के लिए सुनवाई 23 फरवरी तक स्थगित कर दी गई।
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