भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा पाठ्यपुस्तकों के लिए 6,000 करोड़ आवंटित : डॉ. चंदन
हैदराबाद, मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय में उर्दू लेखकों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला मंगलवार से आरंभ हुई। भारतीय भाषा समिति, नई दिल्ली के अकादमिक समन्वयक डॉ. चंदन श्रीवास्तव ने कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष में उर्दू सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा की पाठ्यपुस्तकों के लिए 6,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डॉ. चंदन श्रीवास्तव ने कहा कि भारत सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष में उर्दू सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा की पाठ्यपुस्तकों के लिए 6,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इस पहल का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली 2.5 लाख डिजिटल अकादमिक पुस्तकें तैयार करना है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत भारत सरकार ने उच्च शिक्षा के लिए भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें तैयार करने का कार्य भारतीय भाषा समिति को सौंपा है।
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कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन बने नोडल अधिकारी
उच्च गुणवत्ता वाली उर्दू पाठ्यपुस्तकों के विकास के लिए मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय को नोडल एजेंसी नामित किया गया है तथा इसके कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। डॉ. चंदन श्रीवास्तव ने कहा कि इस योजना में एक हजार से अधिक संस्थानों के 45 लाख शिक्षक और विशेषज्ञ शामिल हैं।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की प्रो. विभा शर्मा ने अपने संबोधन में उर्दू को एक लोकतांत्रिक और समावेशी भाषा तथा भारत की आत्मा का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने कहा कि उर्दू धर्म की भाषा नहीं, बल्कि देश की भाषा है। प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने अध्यक्षीय भाषण देते हुए शिक्षकों को सलाह दी कि वे केवल पाठ्यक्रम तक ही सीमित न रहें। साथ ही उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणालियों को समझने के महत्व पर भी बल दिया। अवसर पर रजिस्ट्रार प्रो. इश्तियाक अहमद ने भारतीय भाषा समिति के प्रारंभिक चरण में मानू की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही उर्दू को एक गंभीर अकादमिक भाषा के रूप में प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रो. रजाउल्लाह खान ने दूरस्थ शिक्षा के लिए स्व-अध्ययन सामग्री तैयार करने में आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया और जानकारी दी कि अब तक 426 स्व-अध्ययन सामग्रियां तैयार की जा चुकी हैं। अनुवाद, अनुवाद अध्ययन, शब्दकोश निर्माण और प्रकाशन निदेशालय (डीटीटीएलपी) के निदेशक तथा भारतीय भाषा समिति उर्दू समन्वयक प्रो. खालिद मुबाशिर जफर ने कहा कि यह कार्यशाला उर्दू के अकादमिक भविष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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