विकसित भारत की लक्ष्य प्राप्ति में उच्च शिक्षा की अहम भूमिका : राज्यपाल

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हैदराबाद, एजुकेशन प्रमोशन सोसाइटी फॉर इंडिया (ईपीएसआई) द्वारा होटल ताज कृष्णा में इंडिया2047 विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण तथा अहम भूमिका पर विशेष रूप से बल दिया।

उच्च शिक्षा की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण

राज्यपाल ने कहा कि जैसे-जैसे हम भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ रहे हैं, उच्च शिक्षा की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। स्वामी विवेकानंद को उद्धफत करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा मनुष्य में विद्यमान पूर्णता की अभिव्यक्ति है। विश्वविद्यालयों को केवल ज्ञान के कारखानों के रूप में ही नहीं, बल्कि ऐसे संस्थानों के रूप में अपनी भूमिका का निर्वाह करना चाहिए, जो युवाओं की आंतरिक क्षमता का पोषण करें।

भारत में वर्तमान में 1,100 से अधिक विश्वविद्यालय और लगभग 4.5 करोड़ छात्र हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक बनाता है। राज्यपाल ने कहा कि हमारा कार्य केवल विस्तार नहीं, बल्कि गुणवत्ता, नवाचार, समावेशिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में परिवर्तन है। राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को परिवर्तनकारी रोडमैप के रूप में रेखांकित करते हुए बहुविषयक शिक्षा, डिजिटल परिवर्तन, कौशल विकास और वैश्विक जुड़ाव पर इसके प्रभाव का उल्लेख किया।

राज्यपाल ने उच्च शिक्षा में परिवर्तन के लिए पाँच प्रमुख क्षेत्रों वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता, कौशल विकास और रोजगारपरकता, समानता और समावेशिता, अनुसंधान और नवाचार तथा मूल्य आधारित शिक्षा को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि अत्याधुनिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भारतीय विश्वविद्यालयों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास किया जाना चाहिए। शैक्षणिक और तकनीकी प्रशिक्षण के साथ नैतिकता, मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना का संचार करना भी आवश्यक है।

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हैदराबाद शिक्षा, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का उदाहरण

राज्यपाल ने हैदराबाद की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह एक शानदार उदाहरण है कि कैसे शिक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार किसी क्षेत्र को वैश्विक केंद्र में बदल सकते हैं। तेलंगाना ने विश्व स्तरीय संस्थानों और अत्याधुनिक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्रों को विकसित करने के लिए प्रतिष्ठा अर्जित की है।

सम्मेलन में ईपीएसआई अध्यक्ष तथा रमैया विश्वविद्यालय के कुलाधिपतिडॉ. एम.आर. जयराम, उपाध्यक्ष डॉ. शेखर विश्वनाथन, वैकल्पिक अध्यक्ष डॉ. एच. चतुर्वेदी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा, तेलंगाना उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. वी. बालसिक्ता रेड्डी, अनुराग विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अर्चना मंत्री, वेल टेक डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ. रंगराजन महालक्ष्मी, कैम्पसूत्र.कॉम और डेब्रिन सिनर्जी के सह-संस्थापक निर्मल्य पाल, विश्व विश्वानी इंस्टीट्यूट ऑफ सिस्टम्स एंड मैनेजमेंट डीन व निदेशक डॉ. वी. जयश्री, 200 से अधिक विचारकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं सहित अन्य ने भाग लिया।

वक्ताओं ने कहा कि 2047 तक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनने की दिशा में भारत की यात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि हम शिक्षा जगत और उद्योग के बीच की खाई को कितनी अच्छी तरह पाटते हैं। इस तरह के सम्मेलन सहयोगात्मक सोच, नीतिगत नवाचार और परिवर्तनकारी कार्रवाई के लिए अत्यंत कारगर सिद्ध हो सकते हैं।

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