अक्षय तृतीया पारणोत्सव की धूम, तीर्थंकर गोत्र बांधने के लिए 20 बोलों का महत्व
हैदराबाद, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमणोपासक संघ श्री गुरु गणेश भवन, रामकोट के तत्वावधान में अक्षय तृतीया पारणोत्सव एवं श्री मरुधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. दीक्षा जयंती, श्रमण संघ स्थापना दिवस एवं पू. अक्षरमुनिजी म.सा. का पोला-तेला तप अनुमोदना, गुरु श्रुत रजत दीक्षा महोत्सव भव्यता से संपन्न हुआ।




















यहां रामकोट में गुरु गणेश के पौत्र शिष्य गुरु मिश्री के सुशिष्य पू.आचार्य श्री शिवमुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती श्रमणसंघीय उपप्रवर्तक महाराष्ट्र भूषण कोटा संघ प्रमुख पू.श्रुतमुनिजी म.सा., तप रत्नाकर पू. श्री अक्षरमुनिजी म.सा., पू. श्री मधुकरमुनिजी म.सा., पू. श्री सुधीरमुनिजी म.सा. के सानिध्य में आयोजित त्रिदिवसीय वर्षीतप पारणा महोत्सव के अंतर्गत गुरु श्रुत रजत दीक्षा महोत्सव, अक्षय तृतीया वर्षीतप पारणोत्सव एवं पू. अक्षरमुनिजी म.सा. पोला तेला तप अनुमोदना कार्यक्रम के अंतर्गत पूज्य श्री पूज्य श्रुतमुनिजी म.सा. ने कहा कि आदिनाथ पारणा महोत्सव अनुमोदना करने के लिए आये धर्म जिज्ञासु के लिए आज का दिन तिथि, वार बहुत ही शुभदायी मंगल दायक है।
श्रेयांश कुमार द्वारा भगवान आदिनाथ का पारणा
आज की तिथि 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया है और तीर्थंकर गोत्र बांधने के लिए 20 बोल बताये हैं। उन बोलों में अनुमोदना करना, गुणगान करना, जयकार, स्तुति करना, गान, उत्कृष्ट भावना से कर्म खप जाए तो तीर्थंकर नाम का गोत्र बंध हो जाता है। अक्षय तृतीया तीज का बहुत महत्व है। यह साधारण नहीं है यह अखंड तिथि है जो कभी क्षय नहीं होती। म.सा. ने कहा कि भगवान आदिनाथ का पारणा श्रेष्ठ भाव से चौथी पीढी के श्रेयांश कुमार ने करवाया इसलिए जैन धर्म में चार पीढी का महत्व है।
म.सा. ने कहा कि तपस्वियों ने 13 माह तक वर्षीतप की आराधना की जिनका पारणा हुआ है। इसी प्रकार पूज्य अक्षर मुनि की दीक्षा के 15 साल हो गये। जब से उन्होंने दीक्षा ली है, तब से वर्षीतप उपवास आयंबिल तेले आयंबिल एकासना और एक साल लगातार एकासना तप और हर साल बडी बडी तपस्या कर रहे हैं। म.सा. ने कहा कि गुरुणी मैया का कहना है यह गादी तपस्वियों की है यह कोटा संघ है जहां प्रेमराज महाराज ने 62 उपवास कर इतिहास रचा। जहां कर्नाटक गजकेसरी गुरुदेव गणेशीलालजी म.सा. अखंड वर्षीतप कर घोर तपस्वी कहलाये।
जहां दक्षिण उपकारी मिश्रीलाल म.सा. उपवास पारणा, तेला पारणा, चोला पारणा, पंचोल पारणा और अठाई पारणा का वर्षीतप किया गया। वे महान तपस्वी कहलाये। उनके बाद तपस्वी राज विवेकमुनि जी ने अंतिम समय तक तप की आराधन तेला तेला पारणा की। अब पूज्य अक्षरमुनिजी दीक्षा लेकर लगातार तपस्यारत हैं। यह तपस्वियों की गादी है। दोनों छोटे संत पू.श्री मधुकरमुनिजी म.सा., पू.श्री सुधीरमुनिजी म.सा. भी तपस्वी हैं, जो इस वर्ष वर्षीतप की भावना रखते हैं।
धन्य हैं तपस्वी : श्रुतमुनिजी
समारोह को सम्बोधित करते श्रुतमुनिजी म.सा. ने कहा कि उपवास वर्षीतप करने वाले, एकासना वर्षीतप करने वाले, आयंबिल वर्षीतप करने वाले धन्य हैं। हम तपस्वियों की अनुमोदना करते हैं। अक्षरमुनिजी ने पोला तेला वर्षीतप धुलिया से चालू किया था जिसे 13 माह हुए लेकिन अभी भी उनका संकल्प शेष है। वरिष्ठ महान संत पूज्य मरुधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. ने श्रमण संघ में 100 साल पहले अक्षय तृतीया का पारणा करवाया तभी से यह आरंभ हुआ।
धुरंधर मारवाड़ के संत मरुधर केसरी के संयम के 108 वर्ष आज परिपूर्ण हुए हैं। मरुधर केसरी वचन सिद्धि थे। मारवाड़ से दक्षिण में आना है तो पहला मंगल पाठ मरुधर केसरी का होता है। मरुधर केसरी की गादी को चलाने वाले 27 गौशाला कराने वाले वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्यश्री रूपचंदजी म.सा. बने। म.सा. ने कहा कि आज श्रमण संघ का स्थापना दिवस है और इसका अमृत महोत्सव मनाया जाएगा। 75 वर्ष पर बड़ी सादडी में स्तंभ स्थापित किया जा रहा है। बड़ा कार्य हो रहा है।
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अगले वर्ष आचार्य शिवमुनिजी के सानिध्य में बड़ा कार्यक्रम
ऑल इंडिया जैन कॉन्फ्रेंस आचार्य भगवंत डॉ. शिवमुनिजी म.सा., युवा आचार्य के सानिध्य में अगले साल बड़ा कार्यक्रम होगा। हमारा श्रमण संघ विशाल है। आचार्य डॉ. शिवमुनिजी के नेतृत्व में 1400 साधु साध्वी विचरण कर रहे हैं। जगह जगह श्रमण संघ के साधु साध्वी धर्म तप की आराधना कर रहे हैं। म.सा ने कहा कि सेवा सभी करें लेकिन गुरु एक ही हो, उसे न बदलें। गुरु को शिष्य की वजह से ही आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
सभी श्रावक श्राविका श्रमणोपासक संघ, गुरु गणेश ट्रस्ट, महिला मंडल, बहू मंडल, कन्या मंडल, श्री महावीर मित्र मंडल, जिनेश्वर मंडल का आभार है। महान संतों ने जो शुभकामनाएं दी हैं, उनके प्रति कृतज्ञ हैं। अवसर पर पूज्य श्री अक्षरमुनिजी म.सा. ने कहा कि आज अक्षय तृतीया है जिसका अर्थ है जो खत्म न हो। अक्षय तृतीया का महत्व जैन दर्शन ही नहीं बल्कि वैदिक दर्शन में भी बताया गया है।
आज के दिन ही महाभारत को लिखने का कार्य हुआ। आज के दिन अन्नपूर्णा देवी का जन्म हुआ है। आज के दिन ही युधिष्ठिर को अक्षय पात्र मिला था। अक्षय पात्र में जो भी आये वह कभी खत्म नहीं होता। आदिनाथ भगवान गांव गांव घूमे, पर उनकी अंतराय नहीं टूटी। 400 दिन के बाद श्रेयांश कुमार के हाथों इक्षु रस से पारणा करने पर अंतराय टूटी। अंतराय टूटेगी नहीं तब तक कोई कार्य नहीं बनता है। अक्षय तृतीया को प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ने जीवन में असि, मसी और कृषि का वर्णन दिया। आज के दिन किया गया दान इस भव में ही नहीं बल्कि परभव में काम आता है।
2009 में श्रुतमुनिजी का चातुर्मास और पारणा महोत्सव
श्रमणोपासक संघ के अध्यक्ष किशोर कुमार मुथा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभी का स्वागत करते हुए कहा कि श्रमणोपासक संघ की स्थापना के बाद पहला चातुर्मास वर्ष 2008 में सरिता म.सा. का हुआ। पूज्य सरिता म.सा. की प्रेरणा से संघ ने दूसरा चातुर्मास श्रुतमुनिजी का वर्ष 2009 में करवाया गया। उस समय भी अक्षय तृतीया के पारणा का महोत्सव आगापुरा जैन भवन में हुआ।
पूज्य दिनेश मुनिजी आदि ठाणा के सानिध्य में रोज गार्डन में संघ का अक्षय तृतीया का दूसरा कार्यक्रम हुआ। आज तीसरा अक्षय तृतीया का पारणा कार्यक्रम पूज्य श्रुतमुनिजी के सानिध्य में गुरु गणेश भवन में किया गया। इस प्रकार महोत्सव का तीन दिवसीय कार्यक्रम संपन्न हुआ जिसमें विभिन्न लाभार्थी ने लाभ लिया। संघ सभी का आभार प्रकट करता है। उन्होंने संघ के पदाधिकारियों, सदस्यों, महिला मंडल, बहू मंडल, महावीर मित्र मंडल, जिनेश्वर मंडल व अन्य मंडलों का आभार व्यक्त किया।
अवसर पर मैलापुर संघ के महामंत्री विमल खाबिया ने गुरुदेव श्रुतमुनिजी म.सा. आदि ठाणा के वर्ष 2026 के चातुर्मास में भाग लेने का सभी से आग्रह करते हुए कहा कि गुरुदेव के चातुर्मास का मंगल प्रवेश आगामी 19 जुलाई को होगा। सभी इसमें भाग लेने का भाव रखें। गुरुदेव पूज्य श्रुतमुनिजी के 25वें दीक्षा महोत्सव पर कांबली ओढाने की बोली का लाभ शांतिलाल दिलीप कुमार भलगट परिवार ने लिया।
कटारिया परिवार ने गुरु भगवंतों को कांबली बोहराई
अक्षरमुनिजी के पोला तेला वर्षीतप के उपलक्ष्य में कांबली ओढाने की बोली का लाभ बाबूलाल सज्जनराज कटारिया लालागुड़ा ने लिया। अवसर पर लाभार्थी परिवार ने गुरु भगवंतों को कांबली बोहराई। लाभार्थी का स्वागत संघ के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। अवसर पर गुरुदेव के संसारी वीर भाई संजय लोढा, अनिता, सोनल, कमलाबाई रांका परिवार, वीरमाता पारसीबाई रांका, वीर बहन कल्पना कांकरिया (जलगांव) , नवरतनमल गौतमचंद धोका परिवार, अभय, श्रीनिधि खाटेड (करमाला), शेरखेडा भवसाबाई बोरना, अहमदपुर, लातूर संघ, लूनार, अकोला, नासिक, जालना, भूसावाल, औरंगाबाद, सेलू से पारणा लेकर पधारे, जिनका स्वागत किया गया।
श्रमणोपासक बहू मंडल द्वारा स्वागत गीतिका प्रस्तुत की गयी। प्रिया कोठारी ने गुरुदेव श्रुतमुनिजी का जीवन परिचय दिया।वर्षीतप तपस्वियों को पारणा गुरु गणेश भवन में कराया गया। कार्यक्रम के पश्चात गौतमप्रसादी का आयोजन गुरु गणेश मिश्री गुरुभक्त परिवार द्वारा किया गया। इक्षु रस के लाभार्थी श्री जैन वेल्फेयर असोसियेशन मलकपेट के सुरेश गादिया, पारस डोसी, दिलीप गादिया रहे, तपस्वियों के प्रथम पारणा के लाभार्थी शांतिलाल दिलीप कुमार भलगट परिवार रहे।
पंडाल के लाभार्थी मनोहरलाल कुशल कुमार, संजय, दिनेश कांकरिया परिवार, स्वागत द्वार लाभार्थी पुष्पा राजेन्द्र कुमार विनोद आनंद विक्रम, अनुराग, अंकुर कीमती परिवार रहे। तपस्वियों के बहुमान के लाभार्थी नवरतनमल ब्रिजेश कुमार आनमंद कोचेटा परिवार रहे। अवसर पर माला पहनाने का लाभ पारसमल देवीचंद गौतमचन्द सिंघवी परिवार, शॉल एवं चूंदडी से स्वागत का लाभ सुभाषचंद ज्ञानाबाई प्रवीण डागा परिवार ने लिया।
लाभार्थियों का संघ पदाधिकारियों ने किया स्वागत
सुबह नवकारसी का लाभ सुभाषचंद ज्ञानाबाई भरत डागा परिवार, प्रभावना का लाभ गिरनारचंद शिखरचंद नरेशचंद, धर्मेन्द्र, कुलदीप शीतल भंडारी परिवार एवं सकल श्रीसंघ से जय जिनेन्द्र का लाभ जुगराज पारसमल गौतमचंद रिषभ यश कोठारी परिवार ने लिया। अवसर पर सभी लाभार्थियों का स्वागत संघ के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में प्रमुख लाभार्थी मुलतानमल प्रकाशचंद बरमेचा, भंवरलाल धनराज गडवाणी, रूपचंद धर्मचंद धीरज भंसाली, मुख्य सहयोगी तेजराज गौतमचंद अजय कोठारी, कूरचंद नरेन्द्र धोका, पारसमल जितेन्द्र आशीष भंडारी, कुशलराज राहुल राजेश पोकरणा, सहयोगी केसरीमल शांतिलाल नवीन कुमार छाजेड, शांतिलाल महेन्द्र कुमार भावेश मुणोत, गौतमचंद उत्तमचंद कोठारी, पारसमल हुकमीचंद सिद्धार्थ तातेड, ताराबाई सुरेश कुमार यशराज कीमती, जुगराज अखेराज निकेश कोठारी, पिरुलाल अमित मनीष नाबेडा, गौतमचंद अनमोल कुमार वे कांकरिया, रिखबचंद अलका श्रेयांस पगारिया, चौथमल दिनेश अरिहंत बडाला का विशेष सहयोग रहा जिनका सम्मान पूर्व में संघ द्वारा किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमणोपासक संघ रामकोट के वरिष्ठ परामर्शदाता सुभाषचंद डागा, सरदारमल रामावत, प्रमुख मार्गदर्शक हर्षकुमार मुणोत, कपूरचंद मुणोत, राजेन्द्र धारीवाल, अमरचंद कोटेचा, अध्यक्ष किशोर कुमार मुथा, कार्याध्यक्ष धनराज गडवाणी, स्वागताध्यक्ष धर्मचंद भंसाली, उपाध्यक्ष गौतमचंद कांकरिया, हुकमीचंद तातेड, देवीचंद सिंघवी, राजेन्द्र सिंघी, नरेन्द्र धोका, टी.गौतमचंद कोठारी, महामंत्री राजेश सुराणा, मंत्री जितेन्द्र भंडारी, सह-मंत्री अनिल पीपाडा, शांतिलाल छाजेड, महेन्द्र मुणोत, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र खारीवाल, सह-कोषाध्यक्ष प्रकाश कोठारी, प्रचार मंत्री रतनचंद कटारिया, प्रकाश गादिया सहित सहयोगी संस्था श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन गुरु गणेश ट्रस्ट, श्री श्रमणोपासक महिला मंडल, बहु मंजल, श्री महावीर मित्र मंडल, श्री जिनेश्वर युवा संघठन, श्री नवकार मित्र मंडल, जैन श्री संघ शमशेरगंज ने अपना सहयोग प्रदान कर कार्यक्रम को भव्य रूप से सफल बनाया।
वर्षीतप करने वाले तपस्वियों को परिवारों ने दी प्रभावना
अवसर पर वर्षीतप करने वाले तपस्वी सज्जनराज भंडारी, रोशनलाल पितलिया, रतनचंद तातेड, महावीरचंद लोढा, परेश मोदी, विनोद सिंघवी, दिलीप डूंगरवाल, भगाचंद गेलडा, नवरतनमल बैदमुथा, सविता सिंघवी, हंसाबेन सावडिया, मीना बोहरा, चंद्रबाला गुगलिया, संतोष देवी गुगलिया, प्रभावती बोहरा, संतोष मुणोत, प्रीता पारख, अस्मिता पारख, संगीता कोठारी, लीलादेवी चोपडा, मधुबाला लूणिया, भूमिका डूंगरवाल, सुनीता नागौरी, वसंता कोचेटा, शशि कोचेटा, सुमन छाजेड, मानकंवर पारख, शोभा आंचलिया, सायारदेवी लोढा, शोभा नाहर, नीतू भंडारी, मोहनदेवी कोठारी, मधु कोठारी, कांताबाई गांधी, महताबबाई गांधी, रूपारानी नागौरी, सुनीता देवी सुराणा, हेमा आंचलिया अन्य परिवार द्वारा तपस्वियों को प्रभावना दी गई।
अवसर पर सुनीता भंडारी, जेठीबाई पितलिया, आशा सिंघवी, कमला सुराणा, मुन्नीबाई सुराणा, अनिता कोठारी, चंचलबाई बोहरा, चेतना बम्ब, कंचनबाई कोचर, कांताबाई गेलडा, शांताबाई मखाणा, किसनाबाई लूणिया, मंजूला लूणिया, निर्मल छाजेड, पारसीबाई रांका, पिस्ताबाई पोरवल, पूर्वा मोदी, रमणबाई कांकरिया, रेखा पीपाडा, सुनीता लूंकड, संगीता ओस्तवाल, सुनीता पितलिया, सूरजबाई सुराणा एवं वसंताबाई आंचलिया को पारणा पूज्य श्रुतमुनिजी आदि ठाणा के सानिध्य में लाभार्थी परिवार द्वारा करवाया गया। साथ ही गौतम कविता अलिजार, राजेन्द्र पुष्पा विनोद कीमती परिवार, पूनमचंद संदीप कोचेटा परिवार सहित अन्य परिवार द्वारा तपस्वियों को प्रभावना दी गई।
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