अखंड चेतन की अनुभूति करने का पर्व है होली : रमेशजी

हैदराबाद, अच्छा-बुरा, दोस्त-दुश्मन का भेद मिटाने के लिए होली पर सभी को एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और गले मिलते हैं। यही होली का आध्यात्मिक रहस्य है। उक्त उद्गार सद्गुरु रमेशजी ने पूर्ण आनंद जनवाड़ा सेंटर में आयोजित होली मिलन कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत पहचान को मिटाकर एक अखंड चेतन की अनुभूति करने का पर्व है होली।

क्षमा और परिवर्तन: जीवन को सकारात्मक दिशा देने का मार्ग

सब कुछ भूल कर नकारात्मक तरंगों से बचने के लिए हमें जीवन की हर परिस्थिति को अपना प्रारब्ध मानकर स्वीकार करना है और सभी से बिना किसी संकोच के क्षमा माँग कर जीवन की बाधाओं को दूर करने की कोशिश करनी है। ज्यादातर हम गलती यह करते हैं कि क्षमा याचना की अपेक्षा क्षमादान के लिए तत्पर रहते हैं, जबकि क्षमा याचना हमें हमारे भीतर की नकारात्मक तरंगों से और सामने वाले के मन में हमारे लिए उत्पन्न होने वाली नकारात्मक तरंगों से तत्काल मुक्ति दिला देती है।

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अवसर पर गुरु माँ ने अपने संबोधन में कहा कि हमें परिवर्तन के लिए सदा तैयार रहना चाहिए, तभी हम परिवार और प्रकृति से अच्छा तालमेल बिठाकर जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। बुरा न मानो होली है का सूत्र हमें हर दिन अपनाना चाहिए। होली के विशेष भजनों के साथ स्वामीजी की आरती, हास्य व्यंग्य, हास्य नाटिका, लठमार होली, फूलों की होली, गुरु प्रेम व गुरु कृपा का सभी श्रद्धालुओं ने आनंद उठाया।

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