विनम्रता से दूसरे के दिल में जगह बनाएँ
किसी के दिल में जगह बना लेना बहुत ही आसान होता है। दूसरे के मन को मोह लेने की सबसे पहली शर्त होती है- विनम्रता। मन में यदि स्वार्थ, दिखावा या छल-फरेब न हो तो किसी को भी अपना बनाया जा सकता है। विनम्र व्यक्ति अपने सरल व सहज व्यवहार से सबको अपना बना लेता है और सबका प्रिय बन जाता है। विनम्र हृदय वाले लोग अधिक आकर्षक और विश्वसनीय होते हैं, जो सदा मजबूत संबंध बनाते हैं।
विनम्रता दूसरों के दिलों में जगह बनाने का सबसे अनमोल गुण है, जो अहंकार को त्यागकर रिश्तों में सौहार्द और सम्मान लाता है। यह व्यवहार में नरमी, वाणी में मिठास और दूसरों के विचारों का सम्मान करने से आती है। इस तरह मनुष्य न केवल दूसरों का विश्वास जीतता है बल्कि अपनी महानता भी स्थापित करते हैं।
विनम्रता और विश्वास रिश्तों की असली ताकत हैं।
विनम्रता का अर्थ झुकना नहीं होता अपितु अहंकार को त्यागकर दूसरों के प्रति सम्मान दिखाना होता है। विनम्र वाणी और व्यवहार से लोग जुड़ते हैं और रिश्तों में दरार नहीं आती। किसी दूसरे के दिल में उतरने के लिए अपने रिश्तों में विश्वास और सच्चाई का होना आवश्यक होता है। अपने प्रियजन के रंग में रंगना ही अपनेपन की सीढ़ी है।
कहने का तात्पर्य है कि दूसरे को उसी रूप में अपना लेना होता है, जैसा वह है। उसकी अच्छाइयों को बढ़ाते हुए कमियों को अनदेखा करना चाहिए। तभी संबंध दूर तक साथ निभा सकते हैं। इससे दूसरों की भावनाओं को समझने में सहायता होती है और जीवन में शांति आती है। यदि किसी व्यक्ति की कमियों को लेकर सदा उसे कोसते रहेंगे, उस पर टीका-टिप्पणी करते रहेंगे तो संबंध कितने भी प्रगाढ़ हों, टूटकर बिखर जाते हैं।
व्यक्ति विशेष की कमियों को अपनी अच्छाई से दूर करने का यत्न करना चाहिए। दूसरे व्यक्ति को उसकी अच्छाइयों और कमियों के साथ स्वीकार करना चाहिए। हमेशा यही सोचना चाहिए कि कोई भी इंसान सर्वगुण संपन्न नहीं हो सकता। यदि वह पूर्ण हो जाएगा तब वह मनुष्य नहीं रह जाएगा अपितु ईश्वर तुल्य होकर हमारी पहुँच से दूर हो जाएगा।
विनम्रता ही दिलों तक पहुंचने का रास्ता है।
मनुष्य जब विनत होता है तब उसमें सबको मंत्र-मुग्ध करने की सामर्थ्य होती है। लोहे जैसी कठोर धातु जब नरम हो जाती है तो उससे मनचाहे पदार्थ बनाए जा सकते हैं। इसी तरह सोने जैसी ठोस धातु को अग्नि में पिघलाकर नरम करके उससे मनभावन आभूषण बनाए जाते हैं। उन आभूषणों को पहनकर सभी इतराते हैं। उसी प्रकार अगर इंसान भी नरम हो जाए तो उसके हृदय से कठोरता या निर्दयता के भाव तिरोहित हो जाते हैं और वह मोम की तरह कोमल बन जाता है।
वह लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लेता है। वह हर व्यक्ति का प्रिय बन जाता है और किसी के लिए भी पराया नहीं रहता।इसके विपरीत जो व्यक्ति अपने स्वार्थ को महत्त्व देते हैं, थोड़े समय पश्चात उनका असली चेहरा सबके सामने आ जाता है। लोग उनसे शीघ्र किनारा कर लेते हैं। उन्हें पराया बनाने में समय नष्ट नहीं करते। अपनी इन्हीं गलतियों से मनुष्य दूसरों से कटकर अकेला हो जाता है। जहाँ तक हित साधने की बात है, वह तो स्वयं ही हो जाता है। इसके लिए छल-फरेब का सहारा लेने की कदापि आवश्यकता नहीं होती।
कठोर मिट्टी पर हल चलाकर किसान उसे नरम बना देता है। तब वह खेत बन जाती है और उसमें गेहूँ को पीसकर जब नरम आटा बनाया जाता है तब उसमें पानी मिलाकर रोटी बनाई जाती है, जो सभी जीवों को पुष्ट करती है यानी सारी प्रकृति ‘स्व’ से परे अपने अहं को किनारे करके ही दूसरों के हृदय में अपना स्थान बनाया जा सकता है। स्वार्थ के वायरस को नगण्य करते हुए, एक-दूसरे के दिल में घर बनाया जा सकता है। इन छोटी-छोटी बातों को यदि अपने ध्यान में खा जाए तभी किसी के दिल में सरलता से अपना स्थान बनाया जा सकता है।
विनम्रता ही अपनापन दिलाती है
विभिन्न प्रकार के अनाज बोए जाते हैं। ये अनाज सभी जीवों का पेट भरते हैं। यही धरती की विशेषता है कि उसे हम सबकी चिंता रहती है। यदि वह स्वार्थी हो जाए तब उसके लिए अपनी जान गंवा देने हेतु कोई भी रणबाँकुरा आगे नहीं आएगा। उस समय इस जीव-जगत में चहुं ओर त्राही त्राही मच जाएगी।
रहकर ‘पर’ को महत्त्व देती है। तभी इस धरा पर हम जीवों का अस्तित्व सुरक्षित रहता है। दूध में शक्कर की तरह घुलमिल जाने और आटे में नमक की तरह एकरूप होकर दूसरों को सुख देने वाले विनयशील व्यक्ति ही वास्तव में अपनी पहचान बनाए रखते हुए भी सबके अपने बनते हैं। यही उनका सबसे बड़ा गुण होताहै, इन गुणों को अपनाने में कभी भी परहेज नहीं करना चाहिए।
विनम्रता सफलता की गारंटी है, क्योंकि यह संघर्षों को सुलझाती है और लोगों के बीच सकारात्मक संबंध बनाती है। यह हमारे चरित्र को निखारती है और अहंकार को गलाकर व्यक्तित्व को महान बनाती है। अपने अहं को किनारे करके ही दूसरों के हृदय में अपना स्थान बनाया जा सकता है। स्वार्थ के वायरस को नगण्य करते हुए, एक-दूसरे के दिल में घर बनाया जा सकता है। इन छोटी-छोटी बातों को यदि अपने ध्यान में खा जाए तभी किसी के दिल में सरलता से अपना स्थान बनाया जा सकता है।
चन्द्र प्रभा सूद
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