4 घंटे की बातचीत बेनतीजा, आरटीसी हड़ताल तय

हैदराबाद, चार घंटे से अधिक समय तक सरकार आरटीसी जेएसी के बीच चली वार्ता का कोई नतीजे नहीं निकला। आरटीसी के सरकार में विलय सहित 12 मांगों को लेकर हड़ताल की घोषणा करने वाले आरटीसी कर्मचारी संघों ने आज आधी रात से हड़ताल पर जाने का निर्णय कर लिया है।
आज शाम आरटीसी कर्मचारी संघों की आईएएस अधिकारियों के साथ हुई बैठक विफल रही। बैठक के बाद जेएसी के नेता वेंकन्ना ने कहा कि हड़ताल की नोटिस के 41 दिन बाद आज जब सरकार से चर्चा हुई तो उनके समाधानों पर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला है। उन्होंने कहा सरकार को अपने सभी वादों को निभाना चाहिए। वर्ष 2022 में जब हड़ताल की घोषणा की गयी थी, तो सरकार ने जिन मांगों को स्वीकार किया था, उन्हीं मांगों को पूरा करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। अपनी मांगों के समर्थन में जेएसी 22 अप्रैल से हड़ताल पर जाएगी।
चर्चा के बाद आरटीसी के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक वाई. नागीरेड्डी द्वारा जारी बयान में कर्मचारियों से ड्यूटी पर लौटने की अपील करते हुए कहा गया है कि कर्मचारियों की समस्याओं पर सरकार सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के प्रति सरकार अत्यंत सकारात्मक है। कर्मचारियों की मांगों पर व्यापक चर्चा के लिए सरकार ने पहले ही आईएएस अधिकारियों की एक विशेष समिति गठित की है, जिसने मंगलवार को कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर चर्चा की। नागिरेड्डी ने कहा कि कर्मचारियों द्वारा उठाईगई कुछ मांगें वित्तीय रूप से जटिल हैं, इसलिए उनका गहन अध्ययन कर समाधान करने के लिए सरकार को कम से कम चार सप्ताह का समय लगेगा। सरकार समस्याओं को चरणबद्ध तरीके से हल करने के लिए तैयार है। प्रबंध निदेशक ने आरोप लगाया कि कुछ संगठन वास्तविक तथ्यों को नजरअंदाज कर हड़ताल का आह्वान कर रहे हैं और कर्मचारियों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे ऐसे प्रलोभनों में न आएं, संस्थान के हित को ध्यान में रखते हुए ड्यूटी पर उपस्थित हों और सरकार को सहयोग दें। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि आरटीसी पर निर्भर दैनिक मजदूरों, छोटे कर्मचारियों और आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करना हर कर्मचारी की जिम्मेदारी है। सभी से जिम्मेदारीपूर्वक अपने कर्तव्यों का पालन करने की अपील की गई।
सरकार का रुख सकारात्मक
चर्चा से पहले मंत्री पोन्नम प्रभार ने कहा कि आरटीसी कर्मचारियों से संबंधित हड़ताल के समाधान और यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इस उद्देश्य से सरकार कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपना रही है। निर्णय लेने की प्रक्रिया में कुछ विलंब हो सकता है, लेकिन कर्मचारियों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों की जांच के लिए चार अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है। सरकार ने अपील की है कि आरटीसी के सभी प्रतिनिधि अपने मुद्दे समिति के सामने रखें। उपमुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री समिति की रिपोर्ट प्राप्त कर सरकारी स्तर पर बैठकर समस्याओं का समाधान करेंगे। मंत्री ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 65 लाख यात्री, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब लोग, रोजगार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए बसों से यात्रा करते हैं। यह बस सेवा गरीबों के लिए जीवन रेखा के समान है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि कर्मचारियों और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार आरटीसी संस्था के संरक्षण, कर्मचारियों के कल्याण और यात्रियों की सुविधा तीनों पहलुओं पर समान रूप से ध्यान देगी। साथ ही कर्मचारियों से अनुरोध किया गया है कि बिना किसी टकराव के अपने सभी मुद्दे अधिकारियों की समिति के समक्ष रखें।
दिन में तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारी संघों की संयुक्त कार्रवाई समिति के अध्यक्ष ई. वेंकन्ना ने आज दोपहर सरकार के साथ वार्ता शुरू होने से पहले मीडिया से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि राज्य सरकार आरटीसी हड़ताल के मुद्दे पर उदासीन बनी हुई है। उन्होंने कहा कि हड़ताल नोटिस दिए जाने के 41 दिन बाद भी सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरटीसी के सरकारी विलय (मर्जर) की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है और मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघ के चुनाव भी नहीं करा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत के नाम पर आरटीसी संपत्तियों के निजीकरण की कोशिश हो रही है और हैदराबाद में आरटीसी की उपस्थिति को धीरे-धीरे कम किया जा रहा है। जेएसी नेता ने आशंका जताई कि आरटीसी की जमीनों को निजी संस्थाओं को सौंपने की योजना हो सकती है और किराये की बसों के ऑपरेटरों की समस्याओं को तत्काल हल करने की मांग की। आउटसोर्स कर्मचारियों से आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यह बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है। सरकार द्वारा आरटीसी मुद्दों की जांच के लिए बनाई गई समिति को उन्होंने टालमटोल की रणनीति करार दिया और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
उल्लेखीय है कि जेएसी नेताओं ने आरटीसी का राज्य सरकार में पूरी तरह विलय, लंबित वेतन और भत्तों में सुधार के लिए 30 प्रतिशत फिटमेंट तथा सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन, सेवा निवृत्ति लाभ, आउटसोर्सिंग कर्मियों का नियमितीकरण, कर्मचारी यूनियनों का चुनाव एवं मान्यता, नये बसों की सरकार की ओर खरीदी, इलेक्ट्रिक बसों का निजीकरण न करना आदि शामिल हैं।
अधिकारियों की समिति : पोन्नम
इससे पूर्व आज दिन में टीजीएसआरटीसी से संबंधित मुद्दों की जांच के लिए सरकार ने अधिकारियों की समिति के गठन का आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन (सामान्य, श्रम एवं नियंत्रण) विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सरकार को तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीजीआरटीसी) के कर्मचारियों से उनकी सेवा शर्तों और संबंधित मामलों के बारे में विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए अभ्यावेदन प्राप्त हो रहे हैं। गहन विचार-विमर्श के बाद सरकार एत्द्वारा टीजीआरटीसी के कर्मचारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच करने और उचित सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए सरकार ने परिवहन, सड़क एवं भवन विभाग के विशेष मुख्य सचिव के नेतृत्व में एक समिति गठित की है।
इस समिति में सरकार के वित्त एवं श्रम विभाग के सचिव के अलावा टीजीएसआरटीसी के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शामिल होंगे। समिति सभी मुद्दों की व्यापक रूप से जांच करेगी और इस आदेश के जारी होने की तिथि से चार सप्ताह की अवधि के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
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