अंतरराष्ट्रीय मानकों पर हैदराबाद का विकास : महापौर
हैदराबाद, ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम महापौर गदवाल विजयलक्ष्मी ने कहा कि हैदराबाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख शहर के रूप में विकसित करने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नागरिक सेवा सुविधा और बुनियादी ढाँचे का विकास निगम का मुख्य लक्ष्य है। इसके लिए अनेक तरह की पहलों पर काम किया जा रहा है। जीएचएमसी मुख्यालय में तेलंगाना स्थापना दिवस समारोह में महापौर गदवाल विजयलक्ष्मी ने पुलिस की सलामी ली।

साथ ही उप महापौर मोते श्रीलता शोभन रेड्डी और आयुक्त आर.वी. कर्णन के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया। समारोह में सफाई, पशु चिकित्सा और कीट विज्ञान कार्यकर्ताओं को पीपीई किट वितरित किए गये। समारोह को संबोधित करते हुए महापौर ने कहा कि तेलंगाना संघर्ष में अनेक लोगों का त्याग और बलिदान शामिल है। उसी भावना के साथ हैदराबाद का विकास करना है। उन्होंने सभी का आह्वान किया कि जीएचएमसी के विकास के लिए समर्पण के साथ मिलकर काम करें, ताकि तेलंगाना राज्य विकास के पथ पर आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि शहर तेज़ी से विकास की ओर बढ़ रहा है।
इस बात को ध्यान में रखते हुए यातायात जाम से बचने के लिए राज्य सरकार ने 7,032 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ एच-सिटी (हैदराबाद इनोवेटिव एंड ट्रांसफॉर्मेटिव इंफ्रास्ट्रक्चर) परियोजना को आकार दिया है। मुख्य जंक्शनों पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए कई तरह के प्रयास किये जा रहे हैं। एच-सिटी के माध्यम से कुल 58 कार्य प्रस्तावित किए गए। इनमें 28 फ्लाईओवर, 13 अंडरपास, 4 आरयूबी, 3 और आरओबी तथा 10 सड़क विस्तारीकरण परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं।
बुनियादी ढाँचा, नाला विकास और फ्लाईओवर कार्य
इन कार्यों के लिए निविदाएँ भी आमंत्रित की गई हैं। इससे पूर्व एसआरडीपी के माध्यम से शहर में कुल 42 कार्य शुरू किए गए थे, जिनमें से अब तक 37 पूरे हो चुके हैं। 178 करोड़ रुपये की लागत से गच्ची बावली ओआरआर से कोंडापुर तक शिल्पा ले-आउट फेज-2 जल्द ही उपलब्ध होगा। यह फ्लाईओवर गच्ची बावली में यातायात की समस्या को काफी हद तक कम करेगा।
महापौर ने कहा कि भारी बारिश के कारण निचले इलाकों के निवासियों को बाढ़ से राहत दिलाने के लिए शहर में रणनीतिक नाला विकास परियोजना पर कार्य जारी है।

इससे शहर की 150 कॉलोनियों और करीब 5 लाख लोगों को पहले चरण में लाभ मिला। पहले चरण में 62 काम किए गए। इनमें से 39 काम जीएचएमसी सीमा में 755.43 करोड़ रुपये की लागत से किए गए। इसी तरह 23 काम निकटवर्ती स्थानीय निकायों में 253.22 करोड़ रुपये की लागत से किए गए। लगभग 29 काम पूरे हो गए। 5 काम प्रगति के विभिन्न चरणों में हैं और अन्य 5 काम विभिन्न कारणों से शुरू नहीं किए गए।
इस योजना के दूसरे चरण में 2141.22 करोड़ रुपये की लागत से 175.83 किलोमीटर नालों के विकास के लिए 148 काम प्रस्तावित किए गए। निकटवर्ती स्थानीय निकायों में 2993.93 करोड़ रुपये की लागत से 267 कार्य किए जाएँगे। शहर में 55 करोड़ रुपये से नालों की सफाई की जा रही है। महापौर ने कहा कि जीएचएमसी में बुनियादी ढाँचे के निर्माण में वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2668.91 करोड़ रुपये की लागत से 10,154 विभिन्न प्रकार के कार्य शुरू किए गए, जिनमें से 1165.81 करोड़ रुपये की लागत से 5,326 कार्य पूरे हो चुके हैं।
सड़कों, सुरक्षा, रोजगार और सौंदर्यीकरण पर कार्य
शेष कार्य प्रगति के विभिन्न चरणों में हैं। विशेषकर सड़कों को प्राथमिकता के साथ विकसित किया जा रहा है। इसी तरह जलभराव की समस्या को कम करने के लिए काम किया जा रहा है। सौंदर्यीकरण कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 107 जंक्शनों में 40 से अधिक का सौंदर्यीकरण किया गया। मानसून के दौरान जनसामान्य को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इस बात को ध्यान में रखते हुए 154 मानसून आपातकालीन दल और 238 स्टेटिक श्रमिक दल बनाये गये हैं।
महापौर ने कहा कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए फुट ओवर ब्रिजों का निर्माण तेज़ी से जारी है। 76.85 करोड़ रुपये की लागत से 23 फुट ओवर ब्रिज बनाए गए, जिनमें से 15 उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि जीएचएमसी में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को करोड़पति बनाने के इरादे से इंदिरा क्रांति योजना के माध्यम से 410 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है। 30 मंडलों में 7000 उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य है।
1000 समूहों को 20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का भी लक्ष्य है। बैंक लिंकेज के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी तरह बेरोजगार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने और रोजगार के अवसरों में सुधार लाने के उद्देश्य से मेहदीपट्टनम और चंदानगर में कौशल केंद्र चलाए जा रहे हैं। यूसुफगुड़ा और उप्पल सर्किल में दो और केंद्र स्थापित करने की तैयारी है।
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छोटे व्यापार, वरिष्ठ सेवा और हरियाली पर जोर
सड़कों पर व्यवसाय करने वाले छोटे व्यापारियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार करने के उद्देश्य से पीएम स्वनिधि के माध्यम से पहले वर्ष में प्रत्येक व्यक्ति को 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इसके तहत जीएचएमसी में 96,381 स्ट्रीट वेंडर्स को कुल 165.92 करोड़ रुपये मंजूर किए गए, जिसमें से 95,752 स्ट्रीट वेंडर्स को 163.85 करोड़ रुपये वितरित किए गए।
वरिष्ठ नागरिकों के बीच सामाजिक संबंधों को बेहतर बनाने और अकेलेपन को दूर करने के लिए डे केयर सेंटर की स्थापना की गयी। 116 डे केयर सेंटर खोले गए। खेल, चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसी तरह शहरी जैव विविधता पर ध्यान देते हुए बड़े पैमाने पर वनीकरण किया जा रहा है।
जीएचएमसी सीमा के अंतर्गत कुल 1049 पार्क हैं, जिनमें 19 प्रमुख, 38 थीम, पंचतंत्र, पामेटो फिकस, बोगनविलिया, हर्बल बांस और अन्य विकसित किए गए। इसके अलावा 770 कॉलोनी पार्क हैं, जिनका प्रबंधन कॉलोनी प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है। हरियाली के कारण शहर के लोगों का जीवन स्तर बढ़ा है। अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त स्नेहा शबरीश, रघु प्रसाद, वेणुगोपाल, सुभद्रा देवी, नलिनी पद्मावती, गीता राधिका, यादगिरी राव, अशोक सम्राट, सीसीपी श्रीनिवास, सीई सहदेव रत्नाकर, अतिरिक्त सीसीपी वेंकन्ना, प्रदीप, ईवीडीएम अतिरिक्त एसपी श्रीनिवास, एसीपी सुदर्शन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पद्मावती, महेश कुलकर्णी, सीटीओ श्रीनिवास, लेखा परीक्षक वेंकटेश्वर रेड्डी, ओएसडी अनुराधा व अन्य उपस्थित थे।
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