आयी बरसात तो
गाती हैं बेग़म अख़्तर
फ़ाकिर की ग़ज़ल
फिर-फिर सुनता हूँ
ग़ज़ल के बोल
बेग़म की बेमिसाल गायकी
मगर बारिश दिल नहीं तोड़ती सुप्रिया साथ है खुले आसमान तले
बारिश में
बरसात में सचमुच बरसती है शराब।
यह भी पढ़े : गुरु को वंदन अभिनंदन

–
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



