श्रीलंका में भारत का 77वां गणतंत्र दिवस मनाया गया

कोलंबो, श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया जिसकी शुरुआत आईपीकेएफ स्मारक पर भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) के सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। उच्चायोग द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ’26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ जो विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। संविधान की प्रस्तावना भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करती है।’

श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने इंडिया हाउस (भारत के उच्चायुक्त का आवास) में भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया और गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। उच्चायुक्त ने भारत की राष्ट्रपति के गणतंत्र दिवस भाषण के कुछ अंश भी पढ़े।सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मुख्य आकर्षण भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का उत्सव रहा।

भारत-श्रीलंका सांस्कृतिक उत्सव, तटरक्षक बल का दौरा

बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में लिखित और बाद में उनके उपन्यास आनंदमठ से अमर हुए वंदे मातरम् का अर्थ है ‘मां, मैं आपको प्रणाम करता हूं।’ गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में, भारत और श्रीलंका के बीच अटूट सांस्कृतिक संबंधों का जश्न मनाने के लिए 23 जनवरी 2026 को ‘टाइमलेस बॉलीवुड मेलोडीज़: अनुराधा पौडवाल लाइव इन श्रीलंका’ नामक एक संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इसके अलावा, भारतीय तटरक्षक बल के दो जहाज, ‘वराह’ और ‘अतुल्या’ श्रीलंका पहुंचे हैं और वे 24 से 27 जनवरी तक अपने प्रवास के दौरान कोलंबो और गाले का दौरा करेंगे। जुलाई 1987 से मार्च 1990 के बीच श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के मौजूद रहने के दौरान भारत ने लगभग 1,200 सैनिकों को गंवा दिया था।

भारत और श्रीलंका ने 29 जुलाई, 1987 को एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद दिल्ली ने द्वीप राष्ट्र में आईपीकेएफ को तैनात किया ताकि तमिल बहुल क्षेत्रों में शांति स्थापित की जा सके जहां वर्षों से व्यापक हिंसा और गृहयुद्ध चल रहा था। (भाषा)

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