ईरान बनाम इजराइल-अमेरिका : पोप की नसीहत और कसमसाता तुर्किये

अमेरिका की हालत आज उस रस्सी की तरह है, जिसका सिरा जल जाये, मगर उसकी ऐंठन न जाये। इस्लामाबाद में हुई वार्ता की विफलता के लिये भी राष्ट्रपति ट्रंप का गरूर और ज़िद जिम्मेदार है, जबकि उनकी सनक और खब्त के फलस्वरूप अमेरिका के भीतर और बाहर उनका विरोध बढ़ता ही जा रहा है। ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, स्पेन, इटली, कोलंबिया और मेक्सिको के राष्ट्राध्यक्षों को छोड़ भी दें तो कैथोलिक – ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप पॉल चौदहवें ने भी ट्रंप की तीखी आलोचना की है।
गौरतलब बात यह है कि पोप पॉल की नसीहत को गंभीरता से लेने या मानने के विपरीत ट्रंप ने पोप पॉल का मखौल उड़ाते हुये बेहद तीखी बातें कहीं हैं। वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से परिस्थितियां और पेचीदा तथा बेकाबू होंगी और एशियाई तथा योरोपीय देशों में अमेरिका के प्रति विरोध की भावना में ज्वार आयेगा। अगर्चे अमेरिका इसमें विफल रहता हैं, तो भी होर्मुज के ईरानी आधिपत्य में जाने से अमेरिका को फजीहत और घाटे का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका के लिये सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ईरान घुटने टेकने के बजाय तबाही का सामना करने को तैयार है।
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तेल अवीव, हैफा और यरूशलम तक पहुंचा संघर्ष का असर
सन् 1948 में अपने जन्मकाल के बाद से ही युद्ध झेल रहे इजराइल का पिछली सभी लड़ाइयों में अपर हैंड रहा है, किंतु इस दफा उसे पहली बार गंभीर क्षति हुई है। ईरान ने राजधानी तेल अवीव ही नहीं, हैफा और येरूशलम तक मार की है और समूचा इजराइल उसकी जद में है। हूती, हिजबुल्लाह और हमास ईरान के साथ हैं और इस्लामी विश्व का शिया और सुन्नी धड़े में विभाजन नहीं होना इजराइल – अमेरिका धुरी के लिये चिंता का सबब है।
इस असमाप्त जंग का ताजा अहम पहलू यह है कि इजराइल को सबक सिखाने के लिये तुर्किये कसमसा रहा है। तुर्क-राष्ट्रपति तैयप एर्दोगान इजराइल को उसकी औकात बताने की बात कर रहे है। इजराइल के मंत्री इतामार बेन ग्वीर ने जहां एर्दोगान पर अशोभन-टिप्पणी की है, वहीं नेतन्याहू ने कुर्दों के नरसंहार के लिये एर्दोगान को आड़े हाथों लिया है।

गौरतलब है कि इस्तांबुल में तुर्किये अभियोजन प्राधिकरण ने नेतन्याहू, गवीर, काट्ज और ताली गोटलीब समेत 35 इजराइलियों के खिलाफ इस्तगासा दाखिल कर करीब पाँच हजार साल तक की मांग की है। ताजा जंग से ओमान, यूएई, सऊदी अरब, कतर, बहरीन आदि में भय और बेचैनी है, वहीं आस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, इटली, स्पेन, ब्रिटेन एवं फ्रांस के अमेरिका को सहायता से हाथ खींचने से अमेरिका सांसत में है।
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