मुख्यमंत्री रेवंत से मिले आरटीसी कर्मचारी संघों के नेता

हैदराबाद, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पुनः दोहराया कि राज्य सरकार आरटीसी कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करेगी। उन्होंने 3 दिनों की हड़ताल अवधि का वेतन देने और हड़ताल के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने के आरटीसी कर्मचारी संघों के अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर को 3 दिनों का वेतन देने और मामलों को वापस लेने के लिए तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिये।

आरटीसी कर्मचारी संघों के नेताओं ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से जुबली हिल्स स्थित उनके आवास पर मुलाकात कर आरटीसी समस्याओं के समाधान के लिए पहल करने पर धन्यवाद दिया।

अवसर पर परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर, सांसद वेम नरेंदर रेड्डी, अनिल कुमार यादव, विशेष मुख्य सचिव विकास राज, आरटीसी एमडी नागिरेड्डी आदि उपस्थित थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा, सरकार में आरटीसी के विलय सहित अन्य मुद्दों पर मजदूर संघों को योजनाबद्ध तरीके से चर्चा कर आगे आना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि वित्तीय पहलुओं के साथ-साथ पीआरसी जैसे मुद्दों पर भी सरकार निर्णय लेगी। उन्होंने समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए मजदूर संघों को आपस में चर्चा कर सरकार के सामने विभिन्न विकल्प प्रस्तुत करने की सलाह दी।

रेवंत ने आश्वासन देते हुए कहा कि आरटीसी की समस्याओं को शत प्रतिशत हल किया जाएगा। सरकार हमेशा मजदूरों के साथ रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि मजदूरों और आरटीसी प्रबंधन के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि संस्था रुक गई तो यह सांस रुकने जैसा होगा, इसलिए संस्था को नुकसान पहुंचाने वाले कोई कदम न उठायें। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक प्रभाव में आने से संस्था को नुकसान होगा।

बसों और भर्तियों में बढ़ोतरी से आय में सुधार

आरटीसी के कर्ज पर ब्याज का बोझ कम करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। संस्था को मजबूत बनाने के लिए कर्मचारियों के सहयोग की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि आरटीसी में बसों की संख्या के साथ-साथ भर्तियां भी बढ़ाई गई है। इससे आय में भी वृद्धि दर्ज हुई। उन्होंने बताया कि गाजुलारामारम में बस टर्मिनल के लिए 100 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। शमशाबाद में 150 एकड़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बस टर्मिनल बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरटीसी हर साल डीजल पर दो हजार करोड़ रुपये तक खर्च करती है।

डीजल खर्च कम करने के लिए ईवी बसों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। एक हजार ईवी बसें खरीद कर उन्हें मेट्रो से जोड़ा जा रहा है। सरकार मिनी बसें खरीद कर आरटीसी को देने पर भी विचार कर रही है। आय बढ़ाने के लिए खर्च कम करना जरूरी है, जिसके लिए ठोस योजना होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आरटीसी के बकाये हमारे कार्यकाल के नहीं हैं, फिर भी उन्हें चुकाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि लंबित अनुकंपा नियुक्तियों को हमारी सरकार ने फिर से शुरू किया।

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आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद कर्मचारियों के बकाया चुकाने की कोशिश की जा रही है। इस बार कर्मचारियों के लिए एक हजार करोड़ रुपये के बकाये जारी किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरटीसी में एक भी ड्राइवर को कम नहीं किया जाएगा। महालक्ष्मी योजना के तहत आरटीसी को 8 हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस मौके पर उन्होंने स्पष्ट किया कि आरटीसी को सुधारने की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर ही है।

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