जीवन ओस की बूंद के समान : भाग्यचंद्रजी
हैदराबाद, मानव जीवन ओस की बूंद के समान क्षणभंगुर है। जैसे वृक्ष का पका हुआ पीला पत्ता झड़ जाता है, वैसे ही मनुष्य का जीवन एक दिन समाप्त हो जाता है। उक्त उद्गार गोशामहल स्थित शंखेश्वर भवन में श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन संघ के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन सभा में भाग्यचंद्रविजयजी म.सा. ने व्यक्त किए। म.सा. ने भगवान महावीर ने प्रधान प्रमुख शिष्य गणधर गौतम स्वामी के माध्यम से जगत के जीवों को यही संदेश दिया कि इस दुर्लभ मानव जीवन को व्यर्थ न गंवाते हुए समय का सदुपयोग धर्म आराधना-साधना में करते हुए सफल और सार्थक बनाने हेतु पुरुषार्थ, प्रयास करना चाहिए।
धर्म साधना में साधक को समय मात्र का भी प्रमाद नहीं करना चाहिए। प्रमाद की अधिकता के कारण यह जीव शुभ, अशुभ कर्मों के अनुसार नरक तिर्यंच आदि चारों गतियों में जन्म मरण रूपी संसार में अनंत काल से भव परिभ्रमण करता रहता है।म.सा. ने पटाखों के दुष्परिणाम बताते हुए कहा कि इनके प्रयोग से धन, जन, मूक जीवों की हानि के साथ हमारा पर्यावरण भी प्रदूषित होता है।
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अत बच्चों के साथ सभी को हमेशा के लिए मन में जीव रक्षा की भावना मजबूत करते हुए आजीवन आतिशबाजी, पटाखों का त्याग करने का संकल्प ग्रहण करना चाहिए। म.सा. ने कहा कि जो दूसरों का तिरस्कार, अपमान करता है, उसे आगे स्वयं अपमानित, तिरस्कृत होना पड़ता है। जो किसी का अहित नहीं करता, वही बहुश्रुत बन सकता है। म.सा. ने कहा कि व्यक्ति गुणों से महान बनता है। प्रचार संयोजक जसराज देवड़ा धोका ने बताया कि धर्म सभा में बाबूलाल सालेचा, पुखराज बालड, कांतिलाल भंडारी, प्रवीण मरड़िया, पारसमल ढेलड़िया, कीर्ति भाई श्रीश्रीमाल व अन्य उपस्थित थे।
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