धर्म रक्षक कूर्म भगवान

हर साल वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को कूर्म जयंती मनाई जाती है, जो आज है। हिंदू धर्म में कूर्म जयंती का बहुत महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु ने अपना द्वितीय अवतार कूर्म (कच्छप) के रूप में लिया था।

माना जाता है कि इस दिन विष्णु जी के इस अवतार की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में आने वाली हर परेशानी दूर होती है और मन की हर मनोकामना पूरी होती है। इसके साथ ही मन शांत होता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की सफाई करके गंगाजल का छिड़काव करें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर विष्णु जी की तस्वीर स्थापित करें। भगवान कूर्म को तिलक लगाकर दीपक जलाएं।

विष्णु जी को अबीर, गुलाल, फूल, चावल आदि सामग्री अर्पित करें। विष्णु जी के मंत्रों और नामों का जाप करें। पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। अंत में विष्णु जी की आरती करके पूजा में हुई सभी गलतियों के लिए माफी मांगें।

महत्व

किसी भी निर्माण कार्य को शुरू करने के लिए कूर्म जयंती सबसे शुभ दिन माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के कूर्म अवतार में योगमाया का स्थान निहित है। यह दिन वास्तु से संबंधित नये घर या काम को बदलने के लिए भी शुभ माना जाता है।

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