कथा सुनने वालों के पास रहते हैं प्रभु : ललितजी
हैदराबाद, भगवान की कथा कोई मनोरंजन की नहीं है, बल्कि यह आत्मा की जागृति करवाती है। जीवन को उन्नत एवं कल्याणकारी मार्ग पर ले जाती है। इसलिए जीवन में प्रभु की कथा सदैव श्रवण करना चाहिए। जो कथा सुनता व नाम जपता है, प्रभु उनके निकट रहते हैं।
उक्त उद्गार मूसापेट स्थित श्री संकटमोचन हनुमान गौसेवा ट्रस्ट में महामंडलेश्वर 108 श्री श्री श्री महंत मदनमोहन दास महाराज की निश्रा में समस्त मार्बल कांट्रेक्टर ग्रुप राजस्थान द्वारा आयोजित श्री गुरु कृपा शिव महापुराण कथा के द्वितीय दिवस कथा वाचक पंडित श्री ललितजी नागर ने दिये। महाराज ने कहा कि जहां गुरु की कृपा हो, वहां भगवान हजार बार दौड़कर आते हैं। जब भी गुरु के दर जाएं, तो वहां से कुछ न कुछ लेकर आएं।
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गुरु के सानिध्य में भगवान की कथा से मार्गदर्शन
गुरु से ज्ञान की चार बातें मिलेंगी, जो जीवन में सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देंगी। श्रीराम श्रीकृष्ण व शंकरजी के भी गुरु थे। शंकरजी श्रीराम कथा सुनने अपने गुरु के पास आये। महाराज ने कहा कि जब भी कथा सुनें, तो जोड़े से सुनें। भगवान शंकर माता पार्वती के साथ श्रीराम कथा सुनने गये। इसी प्रकार यज्ञ की पूर्णाहुति भी बिना जोड़े के नहीं होती है। भगवान की कथा गुरु के सानिध्य में प्राप्त होती है।
आत्मा की जागृति करवाती है और जीवन को उन्नत एवं कल्याणकारी मार्ग पर ले जाती है। इसलिए जीवन में प्रभु की कथा सदैव श्रवण करना चाहिए। महाराज ने आगे कहा कि जैसा बोयेंगे, वैसा ही बाहर आयेगा। अच्छा और बुरा दो मार्ग हैं। बुद्धि से सोचें कि हम किस मार्ग पर हैं। अच्छे मार्ग में कठिनाई आयेगी, पर भगवान मिलेंगे। बुरे मार्ग पर पहले अच्छा लगेगा, लेकिन बाद में कठिनाई ही आयेगी और प्रभु भी दूर होंगे।
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