प्यार में ऐसा इक रोज़ हो जाए

प्यार में ऐसा इक रोज़ हो जाए
मैं बन जाऊँ अमृता तू मेरा इमरोज़ हो जाए
लिखूं मैं पीठ पर तेरी अधूरी ख्वाहिशें अपनी
कम कुछ तो मन का बोझ हो जाए

करूं कुछ गलतियां मैं भी नादानी में
कोई तो मोड़ आए तेरी मेरी कहानी में
दबी चिंगारियों से मुकम्मल सोज़ हो जाए
मैं बन जाऊँ अमृता तू मेरा इमरोज़ हो जाए

टूट जाए जो सब्र का बांध
बहे दरिया फिर आंखों से
मन मेरा सरोज हो जाए
मैं बन जाऊँ अमृता तू मेरा इमरोज़ हो जाए

पूछो हाल वो कहते हैं ठीक है सब
पर वाकई में सब ठीक होता है कब?
जांच इस बात की इक रोज़ हो जाए
मैं बन जाऊँ अमृता तू मेरा इमरोज़ हो जाए

छाये याद की जब बदली
बरस जाऊं बन के फिर बादल
दिल मेरा दरिया ए मौज़ हो जाए
मैं बन जाऊँ अमृता तू मेरा इमरोज़ हो जाए

रंग डालो मुझे अपने ही रंग में
है शिकस्त मुझे प्यारी अपनों से जंग में
दौर रंजिशों का अब ज़मींदोज़ हो जाए
मैं बन जाऊँ अमृता तू मेरा इमरोज़ हो जाए

-प्रज्ञा पांडेय मनु

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