वैश्विक इस्पात साझेदारी के निर्माण हेतु राजदूतों के साथ हुई बैठक
हैदराबाद, पेंद्रीय इस्पात और भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने प्रमुख इस्पात भागीदार देशों के राजदूतों और प्रतिनिधियों के साथ संवादमूलक बैठक में भाग लिया। कुमारस्वामी ने उन्हें इस्पात मंत्रालय के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी भारत इस्पात-2026 में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया, जो अप्रैल-2026 में आयोजित होगी।
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पेंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने सभा को संबोधित करते हुए राजदूतों का स्वागत कर उनकी उपस्थिति के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी भागीदारी भारत द्वारा विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत का इस्पात क्षेत्र आज देश के व्यापक आर्थिक परिवर्तन का प्रतिबिंब है और विकास, दृढ़ता और वैश्विक एकीकरण का मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है।
कुमारस्वामी ने भारत के इस्पात क्षेत्र की मजबूती और सम्मेलन की घोषणा की
कुमारस्वामी ने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है। यह स्थान निरंतर सुधारों, स्थिर निवेशों और आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और स्थिरता पर पेंद्रित स्पष्ट दीर्घकालिक विजन के माध्यम से प्राप्त किया गया है। उन्होंने बताया कि इस्पात क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 2.5 प्रतिशत का योगदान देता है और लगभग 28 लाख लोगों की आजीविका का आधार है।
बुनियादी ढाँचे के विस्तार, विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि और रक्षा एवं परिवहन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के कारण इस्पात क्षेत्र की माँग बढ़ रही है। उन्होंने राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत 2030 तक 300 मिलियन टन इस्पात उत्पादन क्षमता अर्जित करने की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है।
2047 तक 500 मिलियन टन इस्पात उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धियाँ भारत को वैश्विक इस्पात मूल्य श्रृंखलाओं से और अधिक एकीकृत कर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए द्वार खोलेंगी। पेंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि इसी पृष्ठभूमि में इस्पात मंत्रालय ने भारत स्टील नामक वार्षिक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी को संस्थागत रूप देने का निर्णय लिया है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को सूचित किया कि इसके पहले संस्करण का आयोजन आगामी अप्रैल माह में नई दिल्ली के भारत मंडपम् में किया जाएगा।
कुमारस्वामी ने भारत स्टील 2026 को वैश्विक इस्पात मंच बताया
कुमारस्वामी ने बताया कि भारत स्टील 2026 को एक वैश्विक मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो विश्व भर के नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तियों, निवेशकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और खरीददारों को एकत्रित करेगा। इस आयोजन की प्रमुख विशेषता समर्पित रिवर्स बायर-सेलर बैठक होगी, जिसका उद्देश्य संरचित बी2बी जुड़ाव को सुगम बनाना और दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा देना है।
कुमारस्वामी ने राजदूतों और देश के प्रतिनिधियों को अपने-अपने देशों से, विशेष रूप से उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और निवेशकों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने भागीदार देशों को कंट्री राउंडटेबल में भाग लेने और भारत स्टील 2026 में भागीदार देशों के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
संवादमूलक सत्र का समापन करते हुए एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि मजबूत अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और समर्थन से भारत स्टील 2026 इस्पात उद्योग के लिए ऐतिहासिक वैश्विक आयोजन के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि मंत्रालय अप्रैल 2026 में नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करने के लिए उत्सुक है, जिसकी परिकल्पना वैश्विक इस्पात सहयोग के भविष्य को आकार देने वाले निर्णायक मंच के रूप में की गई है।
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