तेल $100 पार, ट्रंप बोले – ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने की यह छोटी कीमत
अमेरिका, मिडिल ईस्ट में जारी जंग और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने तर्क दिया है कि ईरान के परमाणु खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने के बदले में तेल की कीमतों में यह ‘अल्पकालिक’ उछाल एक बहुत ही ‘छोटी कीमत’ है। दरअसल मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
‘कीमतें तेजी से गिरेंगी’: ट्रंप का दावा
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘तेल की कीमतों में यह शॉर्ट-टर्म उछाल, जो ईरान के परमाणु खतरे के विनाश के साथ ही तेजी से नीचे गिरेगा, अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए बहुत छोटी कीमत है। केवल मूर्ख ही इसके विपरीत सोचेंगे!’ ट्रंप का मानना है कि एक बार जब ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताएं नष्ट हो जाएंगी, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता वापस आ जाएगी और कीमतें फिर से कम होंगी।
ट्रंप के दावों के बीच जमीनी हकीकत काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। रविवार को वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गईं। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब तेल इस स्तर पर पहुंचा है। अमेरिका में गैसोलीन की औसत कीमत रविवार को $3.45 प्रति गैलन तक पहुंच गई, जो पिछले हफ्ते के मुकाबले 16% अधिक है।
महंगाई और शेयर बाजार पर मंडराते संकट के बादल
निवेशकों और आर्थिक विशेषज्ञों के बीच इस युद्ध को लेकर गहरी चिंता है। ईरान और खाड़ी देशों के तेल रिफाइनरियों पर हो रहे हमलों से तेल की वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईंधन की बढ़ती कीमतों ने शेयर बाजारों पर दबाव डाल दिया है। ट्रेडर्स को डर है कि तेल की कीमतों में यह उबाल ‘महंगाई’ का एक नया दौर शुरू कर सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचेगा।
भारत के लिए क्या है इसके मायने?
भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ट्रंप भले ही इसे ‘मामूली कीमत’ कह रहे हों, लेकिन भारत जैसे देशों के लिए $100 प्रति बैरल से ऊपर का तेल अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। अगर कीमतें जल्द कम नहीं हुईं, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। तेल खरीदने के लिए भारत को अधिक डॉलर खर्च करने होंगे, जिससे राजकोषीय घाटे पर दबाव पड़ेगा।
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