उस्मान-हिमायत सागर का पानी हरा, जलबोर्ड चिंतित

हैदराबाद, जैसे-जैसे गर्मियों का तापमान अपने चरम पर पहुँच रहा है, वैसे ही पिछले कुछ सप्ताहों से नगरद्वय के प्रमुख जलाशय उस्मान सागर और हिमायत सागर के पानी का रंग हरा होता जा रहा है, जिससे हैदराबाद महानगरीय पेयजलापूर्ति एवं मलजल निकास बोर्ड की चिंता बढ़ गई है।
जल बोर्ड के अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। इस समस्या से निपटने तथा स्वच्छ व सुरक्षित पेय जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहे हैं। पानी के रंग में यह बदलाव अप्रैल की शुरुआत से ही हो रहा है और अधिकारियों द्वारा इसका संभावित कारण पिछले मानसून के दौरान इन जलाशयों में भारी मात्रा में पानी का आना बताया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि नगरद्वय के दो जलाशयों में बाढ़ का भारी पानी आया था और ऊपरी इलाकों से बहकर आई टन भर अवांछित वनस्पति (घास-फूस) बाढ़-द्वारों पर जमा हो गई थी, जोकि पानी के रंग में बदलाव का कारण हो सकती है।
रोज 3000 सैंपल से पानी की गुणवत्ता की जांच
इन जलाशयों में पानी के रंग में बदलाव का एक और संभावित कारण इस गर्मी के मौसम की शुरुआत से ही पड़ रही भीषण गर्मी है। अधिकारी ने कहा कि जैसे ही गर्मियों का मौसम अपने चरम पर पहुँचने लगा, पानी के रंग में यह बदलाव नजर आने लगा। जलबोर्ड के प्रबंध निदेशक के. अशोक रेड्डी ने लगभग एक लाख उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित पीने का पानी सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं, जो उपभोक्ताओं को यहीं से पानी की आपूर्ति करती आ रही है।
जलबोर्ड द्वारा उठाए गए कदमों के तहत, पानी के स्रोत से लेकर उपभोक्ता के दरवाज़े तक पानी के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। जलबोर्ड गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण विंग के अधिकारी के अनुसार हर दिन लगभग 3,000 पानी के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं और गुणवत्ता की जाँच के लिए हमारे गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण (क्यूएटी) विंग को भेजे जा रहे हैं। अशोक रेड्डी ने कहा कि यह दोनों जलाशय पुराने शहर के कई हिस्सों के लिए जीवनरेखा का काम करते हैं, यहाँ के निवासी अपने दैनिक जीवन में पानी की जरूरतों के लिए इन्हीं पर निर्भर रहते हैं।
14 किमी पाइपलाइन से जलाशय का पानी होता है ट्रीटमेंट
ये जलाशय कई इलाकों में पानी की आपूर्ति करने में विशेष रूप से जब पानी की माँग बहुत ज्यादा होती है, अहम भूमिका निभाते रहते हैं। इस स्रोत से मिलने वाला पानी पुराने शहर के 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से की प्यास बुझाता है, जबकि शेष 30 प्रतिशत पानी बंजारा हिल्स, जुबली हिल्स और रेड हिल्स के कुछ इलाकों में भेजा जाता है। पिछले कई दशकों से आसिफ नगर फ़िल्टर बेड से उपचारित (ट्रीटेड) पानी की आपूर्ति की जा रही है, इन फ़िल्टर बेड का निर्माण 1920 में किया गया था।
उस्मान सागर जलाशय से कच्चा पानी (रॉ वाटर) उपचार के लिए 14 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के ज़रिए गुरुत्वाकर्षण बल की मदद से आसिफ नगर फ़िल्टर बेड तक पहुँचता है। इन दोनों जलाशयों से वर्तमान में उस्मान सागर से सामान्य 27 एमजीडी और वर्तमान में 26 एमजीडी और हिमायत सागर से सामान्य 18 एमजीडी व वर्तमान में 12 एमजीडी की आपूर्ति की जाती है।
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